जिम्मेदारी से मुकर रहे खनिज अधिकारी जिले में सब ठीक है का रट के बाद दो अवैध क्रेशर सील!

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खमोद चन्देल की रिपोर्ट –

 

डिंडोरी। जिले में अवैध रेत उत्खनन और अवैध क्रेशर मशीनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर जिला खनिज अधिकारी श्री अशोक कुमार नागले जिले में सब कुछ नियमों के दायरे में होने का दावा कर रहे हैं, वहीं उनके दावे के ठीक अगले दिन हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने विभाग की जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यह विरोधाभास खनिज विभाग के भीतर बड़े गोलमाल या संरक्षण की आशंका को बल देता है।

 

*रेत के भंडारण और अनियमितता: JCB से खनन की आशंका*

जब संवाददाता ने खनिज अधिकारी अशोक नागले से जिले में अवैध खनन को लेकर संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि जिले में 47 क्रेशर प्लांट संचालित हैं और रेत की केवल दो अनुमतियाँ वैध हैं।

 

उन्होंने वैध अनुमतियों का भंडारण विवरण भी दिया, जो मेसर्स गुरजीत सिंह बेदी, छिंदवाड़ा के नाम पर वित्तीय वर्ष 2023 से 2026 तक दर्ज हैं:

 

अंधियार खोह (खसरा नंबर 29, रकबा 4.24 हे.): कुल भंडारण 6,19,23 घन मीटर में से शेष भंडारण 24,316 घन मीटर।

 

कठौतिया (खसरा नंबर 129, रकबा 2.00 हे.): कुल भंडारण 67,304 घन मीटर में से शेष भंडारण 12,429 घन मीटर।

 

सबसे गंभीर शिकायत अंधियार खोह (दिवारी माल) क्षेत्र को लेकर मिली है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त ठेकेदार हर साल वर्षाकाल के बाद नदी में जेसीबी मशीन उतारकर खनन करता है, जो स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध है। संवाददाता ने अधिकारी को सचेत किया कि अगर जेसीबी मशीन नदी में उतरी तो जिम्मेदारी विभाग की होगी, क्योंकि नियमों का उल्लंघन एक वार्षिक प्रथा बन चुका है, जिसकी जानकारी विभाग को पहले से है।

 

*हर सवाल से पल्ला झाड़ते और मुकरते रहे अधिकारी*

 

खनन और प्रदूषण संबंधी नियमों के उल्लंघन पर जब अधिकारी से सवाल किया गया, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना और उदासीन रवैया खुलकर सामने आया:

 

पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण पर: जब पत्रकार ने पूछा कि क्रेशर प्लांट नियमानुसार लगे हैं या नहीं, और क्या प्रदूषण नियंत्रण आदि का ख्याल रखा जा रहा है, तो उनका कहना था कि “हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम जाकर देखें कि क्रेशर में प्रॉपर नियमानुसार प्रदूषण का आदि का ख्याल रखा जा रहा है या नहीं।”

 

सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर: सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर उन्होंने कहा कि “लोग नियम नहीं मानते हैं तो वे क्या करें? वे तो निर्देश दे देते हैं कि मानो, पर लोग नहीं मानते।” उन्होंने यह कहते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि “DGMS (Directorate General of Mines Safety) देखेगा।”

 

अधिकारी हर बात से मुकरते और अपनी जिम्मेदारियों को दूसरों पर टालते नज़र आए।

 

*खनिज अधिकारी के दावे और कार्रवाई में विरोधाभास: अक्षमता उजागर*

अवैध क्रेशर के सवाल पर खनिज अधिकारी अशोक नागले ने एक दिन पहले दावा किया था कि जिले में एक भी अवैध क्रेशर संचालित नहीं है।

 

लेकिन, उनके इस दावे के ठीक एक दिन बाद—यानी गुरुवार, 09 अक्टूबर 2025 को—अनुविभागीय अधिकारी शहपुरा के निर्देशन में माइनिंग अधिकारी, तहसीलदार शहपुरा और राजस्व दल द्वारा शहपुरा में संचालित दो स्टोन क्रेशर इकाइयों को अवैध संचालन के कारण सील कर दिया गया।

 

यह जवाब और कार्रवाई का विरोधाभास, खनिज अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर संदेह उत्पन्न करता है। क्या यह विभागीय निष्क्रियता है, या फिर जानबूझकर अवैध कारोबार को अनदेखा करने का प्रयास किया जा रहा है?

 

कलेक्टर से सख्त हस्तक्षेप की मांग

यह विरोधाभासी स्थिति दर्शाती है कि जिले में खनिज नियमों का पालन कागजों तक सीमित है और अधिकारी जवाबदेही से मुकर रहे हैं। कलेक्टर से अपेक्षा है कि वे जेसीबी से नदी में खनन की आशंका, अवैध क्रेशरों के संचालन और अधिकारी के गैर-जिम्मेदाराना बयानों को लेकर उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दें। जवाबदेह अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए ताकि अवैध खनन और क्रशर संचालन पर अंकुश लगाया जा सके।

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