मिट्टी में मिल गई मृदा परीक्षण योजना: निजीकरण और लापरवाही से किसानों की कमर टूटी

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चलित वैन बनी कबाड़, भवन जर्जर, उपकरणों की बिक्री—सीधी जिले के अन्नदाता सुविधा के लिए भटक रहे

 

प्राइड इंडिया न्यूज़, सीधी से शाहिद खान।

सीधी। खेती को लाभ का धंधा बनाने के दावे तो बहुत किए गए, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सीधी जिले में किसानों को आधुनिक कृषि सुविधा देने के लिए स्थापित किए गए मिट्टी परीक्षण केंद्र और करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई चलित वैन प्रशासनिक लापरवाही और निजीकरण की भूख की भेंट चढ़ गए।

करीब पांच साल पहले बनकर तैयार हुए मिट्टी परीक्षण केंद्र आज तक शुरू नहीं हो पाए। न तो आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति हुई, न ही उपकरणों का समुचित उपयोग। कई स्थानों पर तो उपकरणों को कबाड़ समझकर ठेकेदारों को बेच दिया गया। केंद्रों के भवन भी अब जर्जर हालत में हैं।

चलित वैन भी बनी कबाड़—52 लाख की वैन धूल फांक रही।

वर्ष 2014-15 में 52 लाख 40 हजार रुपये की लागत से मिट्टी परीक्षण वैन खरीदी गई थी। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस यह वैन सीधी के कुसमी थाने में धूल फांक रही है। संचालन के लिए न ईंधन मिला, न चालक, न ही स्थाई बजट। वैन संचालन के लिए अधिकारियों को निर्देश जरूर दिए गए थे, लेकिन अनदेखी के चलते यह योजना दम तोड़ गई।

स्थानीय स्तर पर नहीं हो रहा मृदा परीक्षण।

विकासखंड मुख्यालय कुसमी, सिहावल, मझौली और रामपुर नैकिन में मिट्टी परीक्षण केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन स्टाफ और संसाधनों के अभाव में किसान अब भी 100 से 150 किमी दूर जिला मुख्यालय जाने को मजबूर हैं। अधिक दूरी के चलते कई किसान परीक्षण नहीं करा पाते, जिससे उन्हें अपनी जमीन में पोषक तत्वों की कमी या अधिकता का ज्ञान नहीं हो पाता और उत्पादन में गिरावट झेलनी पड़ती है।

 

कृषि विभाग में बड़े पैमाने पर पद खाली

उपसंचालक कृषि संजय श्रीवास्तव का कहना है कि केंद्र स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है। विभाग में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिससे संचालन प्रभावित हो रहा है।

किसानों का सिस्टम से मोहभंग

मिट्टी परीक्षण की असफल योजनाओं से किसानों में व्यवस्था को लेकर गहरा अविश्वास पनप रहा है। प्रशासन की नाकामी और निजी हितों की भूख ने खेती को लाभ का धंधा बनने से पहले ही रोक दिया है।

 

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