नगर पालिका उपाध्यक्ष को झटका: हाई कोर्ट ने चेंबर आवंटन याचिका की खारिज, प्रशासनिक आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

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सीधी। नगर पालिका परिषद सीधी के उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह चौहान को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उपाध्यक्ष द्वारा चेंबर खाली कराए जाने के मामले में दायर याचिका को जबलपुर हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल की गई थी, जिसमें नगर परिषद द्वारा पारित आदेश को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए रद्द करने की मांग की गई थी।

 

दरअसल, उपाध्यक्ष चौहान को पूर्व में नगर पालिका भवन में एक अस्थाई चेंबर दिया गया था, जिसे उन्होंने ताला लगाकर बंद कर दिया था। तय समयसीमा में ताला न खोलने पर नगर परिषद के अधिकारियों, पार्षदों और मीडिया की मौजूदगी में चेंबर का ताला तोड़कर उसे खाली कराया गया। इसके बाद नगर परिषद ने उक्त कक्ष क्रमांक 26 को डीयूडीए (जिला नगरीय विकास अभिकरण) कार्यालय को आवंटित कर दिया।

 

उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उनके अनुपस्थित में कक्ष पर कब्जा किया गया और यह कार्रवाई उन्हें नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई क्योंकि उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष को दिया गया ऋण वापस न मिलने पर शिकायत की थी। उनके वकील ने दलील दी कि आदेश दुर्भावना से पारित किया गया है और इस पर न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए।

 

वहीं नगर परिषद की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह आदेश प्रशासनिक प्रकृति का है, न कि अर्ध-न्यायिक, और उपाध्यक्ष को स्थायी चेंबर देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर पालिका संचालन में बाधा न आए, इसके लिए डीयूडीए को कक्ष आवंटित किया गया।

 

22 अप्रैल 2025 को हुई सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय जबलपुर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नगर परिषद द्वारा याचिकाकर्ता के किसी वैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है। केवल प्रशासनिक आदेश होने के कारण न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। साथ ही, दुर्भावना के आरोपों को भी साक्ष्य के अभाव में अस्वीकार कर दिया गया।

 

इस फैसले के बाद यह तय हो गया है कि अब नगर पालिका उपाध्यक्ष को चेंबर मिलने की संभावना बेहद कम है और उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ही कार्य करना होगा।

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