भीषंण दुर्घटनाएं छोंड़ती सवाल पर सवाल, आरटीओ कार्यालय कार्यवाही में कंगाल

0 5,824

रिपोर्ट-नेशनल ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा

सीधी- ऐसा लगता है कि भीषण दुर्घटनाओं की जैसे बाढ़ सी आ गई हो और उस बाढ़ में धीरे-धीरे सब कुछ बहता चला जा रहा है। कुछ खास करने के बजाय अफसोस जाहिर करने एवं औपचारिक कार्यवाही के पश्चात जैसे सारी जिम्मेदारियां पूर्ण हो जाती हों। यातायात परिवहन विभाग द्वारा असरकारक उपाय नहीं किए जाने से लोगों के अंदर ही अंदर आक्रोश की भावना पनपने लगी है! दो पहिया वाहन हों या फिर चार पहिया वाहन, नाबालिगों के हाथ में इनकी स्टेयरिंग थामे फर्राटा भरते हुए आराम से देखे जा सकते हैं!आश्चर्य तब होता है जब आर.टी.ओ.कार्यालय द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस देते समय व्यक्ति को कुशल चालक के रूप का परीक्षण करना जरूरी नहीं समझते हुए सकुशल चालक का लाइसेंस थमा दिया जाता है! जिसका दुखद परिणाम सड़क पर देखने को मिलता रहता है। और वाहन मालिकों द्वारा इन्हीं ड्राइविंग लाइसेंसों के आधार पर बिना किसी परीक्षण के विशेष जिम्मेदारी ड्राइवरों को सौंप दी जाती है!

संक्षेप में अगर कहें तो यह कि, यातायात अधिकारियों का ध्यान इन सभी मसलों की ओर जाता ही नहीं है! जिससे बदहाल यातायात व्यवस्था सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें! वाहनों के दस्तावेजों की सघन जांच कर कड़ी कार्यवाही की जाए! जिससे यातायात नियमों को ठेंगा दिखाने वालों को कड़ा सबक एवं शंदेश मिले तथा कोई भी यातायात नियमों को अनदेखा करने का दुस्साहस ना कर सके!

आए दिन ह्रिदय विदारक दुर्घटनाएं सवाल पर सवाल छोंड़ कर चली जाती हैं! सड़क सुरक्षा की कमान संभालने वाले कोई भी ठोस कदम उठाने में समर्थ क्यों नहीं हो पाते ?असीमित रफ्तार पर अंकुश क्यों नहीं लगा पाते ?आने वाले खतरों की सूचना देने वाले अलार्म चिन्हित स्थानों पर क्यों नहीं लगाए जाते ? वाहनों में आंखों को चकाचौंध कर देने वाली लाइटों एवं हैलोजनों पर पाबंदी क्यों नहीं लगाई जाती ?

शाहिद खान सिहावल

ऐसे अनेकों सवाल आपके अंतर्मन में भी चहल कदमी कर रहे होंगे। अप्रत्याशित भीषण सड़क दुर्घटनाओं से बचाव हेतु टेंढी़ उंगली से भी “घी” निकालना पड़े तो ऐसे रास्ते निकाले जा सकते हैं। प्रस्तुत है सीधी से नेशनल ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा की विशेष रिपोर्ट।

Web TV

अगली ख़बर

Leave a comment