सीधी में जल सत्याग्रहः न्याय की चीखें और प्रशासन की खामोशी

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सीधी /(मध्य प्रदेश)
प्राइड इंडिया न्यूज संवाददाता सूरज केवट की खास रिपोर्ट

मध्‍यप्रदेश पुलिस कानून भूलकर सीधी में आदिवासी महिलाओं और पुरुषों पर कहर बनकर बरस गई. अपनी जमीन की रक्षा और प्रशासन से मांग करने के लिए जल सत्‍याग्रह कर रहे ग्रामीणों ने सोचा नहीं था कि उनके साथ ऐसा व्‍यवहार होगा. ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना में भू अधिग्रहण से परेशान आदिवासियों अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. आइए जानते हैं पूरा मामला.

सीधी. देश भक्ति और जनसेवा का नारा बुलंद करने वाली मध्‍य प्रदेश पुलिस ने एक बार फिर अपना दूसरा रूप दिखा दिया है. सीधी में आदिवासी महिला-पुरुषों के साथ उसका व्‍यवहार ऐसा था कि देखने वाले सिहर गए. पुलिस ने कानून भूलकर महिलाओं और पुरुषों के साथ व्‍यवहार है. यहां जल सत्याग्रह कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने बर्बरता की है. अपने व्‍यवहार पर पुलिस ने चुप्‍पी साध ली है और प्रदर्शन कर रहे लोगों को जेल भेज दिया है. प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि यदि हमें हमारी जमीन का सही मुआवजा मिल जाता तो हम प्रदर्शन क्‍यों करते? हम ललितपुर सिंगरौली रेल परियोजना में भू अधिग्रहण से परेशान हैं.

सीधी में जल सत्‍याग्रह करने वालों पर जमोड़ी और सिटी कोतवाली थाना प्रभारी सहित पुलिस कर्मियों ने बल का प्रयोग किया है. आरोप है कि पुलिस ने कानून का पालन नहीं किया और आदिवासी महिलाओं और पुरुषों से धक्‍का-मुक्‍की की और जबरन पुलिस पकड़कर ले गई. विवेक पांडेय शिवसेना नेता ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन जिला प्रशासन के खिलाफ था जिस लिहाज से पुलिस प्रदर्शन कार्यों को रोकने के लिए बर्बरता की है. कलेक्ट्रेट के सामने स्थानीय विधि का भवन में पिछले 5 महीने से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी था लेकिन जब जिम्मेदार कलेक्टर से लेकर अफसर ने नहीं सुनी तो लोगों ने जल सत्याग्रह करने की ठानी थी.

अधिग्रहण से परेशान आदिवासी कर रहे थे जल सत्याग्रह शिवसेना नेता सहित आदिवासियों के साथ बर्बरता की गई और सत्याग्रह में शामिल आदिवासी लोगों और नेताओं के साथ धक्का-मुक्की की गई है. पुलिस घसीटते हुए सत्याग्रह कर रहे लोगों की आगे की कार्यवाही के लिए जमोड़ी थाना ले गई. दरअसल शिवसेना नेता ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना में भू-अधिग्रहण से परेशान आदिवासी ग्रामीणों को लेकर जल सत्याग्रह करने गए थे. सीधी जिला प्रशासन के खिलाफ आदिवासी पीड़ित लोग गोपाल दास बंधा में जल सत्याग्रह कर रहे थे.जिला प्रशासन ने पुलिस को आगे कर जल सत्याग्रह करने से रोक लगाई थी. बावजूद इसके पुलिस व्यवस्था में हुई लापरवाही के चलते लोगों ने दूसरे रास्ते से जल सत्याग्रह करने बंधा के गहरे पानी उतर गए थे.

प्राइड कदम हिंदी समाचार एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ (मध्य प्रदेश)।

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