गंदी राजनीति और पक्ष विपक्ष के कारण नगर निगम का विकास नहीं हो पाया : आम जनता ।

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बेतिया । नगर निगम के चुनाव के समय में सारे जन प्रतिनिधि जनता के द्वार पर जाकर हाथ जोड़ते हैं, पैर पकड़ते हैं, भैया, चाचा, दादी, मां,दीदी, बहन आप सभी लोग वोट दीजिए आपकी सेवा में हमेशा खड़े रहेंगे । अब इन शब्दों को देखा जाए तो लगता है वह सारी चीजें सिर्फ वोट लेने के लिए थी ना की जनता के हित में कार्य करने के लिए । अपने सट्टा की दहलीज पर बैठकर सत्ता की मलाई खाने के लिए वही कारण है कि जिसके कारण बेतिया नगर निगम का विकास ठप पड़ा हुआ है हालात बद से बत्तर होते जा रहे हैं कभी पार्षदों के बीच राजनीति कभी महापौर और पार्षदों के बीच अनबन आखिर इन सब का भुगतना तो जानता ही भुगति है विकास की अगर देखें तो सड़कों से पता चल सकता है, नलों से पता चल सकता है थोड़ी सी पानी में बेतिया डूबने को हो जाता है। जनता की परेशानियां बढ़ जाती है आखिर इन सब के लिए जिम्मेवार कौन है ? नगरवासियों में हलचल मची हुई है सभी लोगों का कहना है कि बिहार में सबसे ज्यादा वोट से जीतने वाली महापौर गरिमा देवी सिकरिया हैं चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए गए थे लेकिन अब वह निराधार दिख रहे हैं जिसका कोई आधार नहीं है इतनी गंदी राजनीति क्यों करते हैं जन-प्रतिनिधिगण वहीं नगर के दीपक राम, अतुल माझी, चंद्रशेखर तिवारी, मोहन भगत ,रमेश पांडे ,सतीश सिंह, दीपक राय, प्रेमचंद सिंह, रविंद्र सिंह, गोपाल तिवारी, सोहन राव आदि अनेकों लोगों का यही सारी बातें कहना है कि अब बेतिया का विकास होना संभव नहीं है क्योंकि काम के जगह सिर्फ गंदी राजनीति हो रही है । हम लोगों की परेशानियां बढ़ जाती है नालो का सही से विकास नहीं हो पाया और बड़े-बड़े वादे लोग आते हैं और करके चले जाते हैं ।वहीं कुछ लोगों ने बेतिया सांसद डॉक्टर संजय जयसवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सिर्फ जीत का रिकॉर्ड दर्ज करने में लगे हैं कार्य का रिकॉर्ड कौन करेगा ,सिर्फ मोदी जी के नाम पर जीतने वाले लोग हैं पश्चिमी चंपारण जिले में एक से बढ़कर एक पदे आई और गई लेकिन विकास नहीं हो पाया। आखिर क्यों ? लोगों का कहना है कि यह लोग सिर्फ अपना देखते हैं जनता का कौन देखता है । अब सवाल यह उठता है कि आखिर इसका जिम्मेवार कौन हर बार जनता के विश्वास के साथ विश्वास घात क्यों किया जाता है सिर्फ वादों पर काम नहीं चलता है कार्य करना पड़ता है जो धरातल पर नहीं दिखता । सिर्फ न्यूज़ के माध्यम से दिखता है कागजों में दिखता है वही बहुत तेरे लोगों का यह भी कहना था कि बेतिया नगर निगम का हाल बद से बत्तर होते जा रहा है लेकिन ना यहां के सांसद को कोई परवाह है ना यहां के महापौर को कोई परवाह है ना पार्षदों को कोई परवाह है सभी लोग सिर्फ अपना पॉकेट भरने में लगे हैं । जनता के जान से खेला जा रहा है सड़कों की स्थिति से देख सकते हैं कभी-कहीं कोई गिरता है किसी का हाथ टूटा है किसी का पैर टूटा है ये तो तब पता चलता ना जब जनप्रतिनिधि के घर के किसी व्यक्ति के साथ कोई घटना घटती । मामला जो भी हो लेकिन है जांच का विषय । आम जनता के हित में अगर कार्य नहीं हुआ तो साहब जानता तो जानता है आम जनता की नजरों से सवाल का बवाल तो होगा । क्योंकि अपने जनप्रतिनिधि को सिर्फ मुखौटा के लिए नहीं चुना जाता है उनसे कुछ उम्मीदें होती है जनता की जो सार्वजनिक तौर पर होती है वह पूरा होना चाहिए ।

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