बजट के अभाव में जाम हुआ काम का पहिया, नहीं रहे सरपंच

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नेशनल ब्यूरो चीफ- राकेश शर्मा की यह विशेष रिपोर्ट

सीधी- ग्राम पंचायतों का चुनाव जनवरी में संपन्न होने के बाद नए सरपंचों के चेहरे पर वह खुशी नहीं आई जो ग्राम पंचायतों के विकास के लिए बजट आने के बाद देखी जाती है! सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक के अंतर्गत ऐसी कई ग्राम पंचायतें हैं जहां पूर्व सरपंचों के द्वारा उनके कार्यकाल के अंतिम दौर में विकास के लिए आए खजाने को अपनी जेब भरने के लिए दोनों हाथों से बटोरा गया! पुराने सरपंच नहीं रहे उनकी जगह नए सरपंचों ने ली, लेकिन कुछ पूर्व सरपंचों द्वारा किए गए अद्भुत शातिराना कार्यों की कलई परत दर परत खुलने के लिए तैयार नए सरपंचों की राह निहारती हुई दिखाई देती है!

बरसात का महीना कुछ ही दिनों में आने वाला है! खराब पड़े रास्तों के लिए कोई नया बजट ना आने से सरपंचों का मानना है कि जब कोई काम के लिए बजट ही नहीं आ रहा है तो वह सरपंच ही नहीं रहे! नए सरपंच सिर्फ पिट्ठू बैग टांगे अपने ग्राम पंचायत के विकास के लिए इधर से उधर गुलछर्रे उड़ाने की फिराक में गर्मी के इस तपन में पसीना पोंछते हुए दिखाई दे ही जाते हैं!

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