अपनी जन्मभूमि की गौरव गाथा लिखना साहित्य की सबसे बड़ी सेवा — डॉ. मुन्नालाल देवदास
कपसीडीह की गौरवगाथा पुस्तक का विमोचन, प्रथम कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित

गरियाबंद ।
“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान होती है। अपनी जन्मभूमि के इतिहास, संघर्ष, संस्कृति और उपलब्धियों को शब्दों में संजोना साहित्य की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। अपनी जन्मभूमि की गौरवगाथा लिखने वाला कलमकार वास्तव में साहित्य का सच्चा सेवक होता है। यह विचार राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधान पाठक, नवाचारी शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. मुन्नालाल देवदास ने ग्राम कपसीडीह में आयोजित “कपसीडीह की गौरवगाथा” पुस्तक विमोचन, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में विशेष अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
डॉ. देवदास ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का कपसीडीह गांव लगभग 300 वर्ष पूर्व खेत-खलिहानों के बीच करीब 20 परिवारों से आबाद हुआ था। प्रारंभिक दौर में गांव तक आवागमन के समुचित साधन एवं मार्ग उपलब्ध नहीं थे। विषम परिस्थितियों के कारण आसपास के गांवों के लोग कपसीडीह से रोटी-बेटी का संबंध बनाने में भी संकोच करते थे। इसके बावजूद ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने गांव के विकास के लिए निरंतर संघर्ष किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में कपसीडीह को राजस्व ग्राम का दर्जा प्राप्त हुआ। वर्तमान में गांव में परिवारों की संख्या 150 से अधिक हो चुकी है। ग्राम में प्रतिवर्ष त्रिदिवसीय राज्यस्तरीय मानस गान महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके अलावा शिक्षा, साहित्य, कला-संस्कृति, सामाजिक जागरूकता एवं जनसेवा के क्षेत्र में भी गांव ने अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
इन्हीं गौरवपूर्ण इतिहास, संघर्षों, उपलब्धियों और सांस्कृतिक परंपराओं को संकलित कर युवा साहित्यकार वीरेन्द्र सिंह ठाकुर द्वारा “कपसीडीह की गौरवगाथा” पुस्तक का लेखन एवं प्रकाशन किया गया, जिसका समारोहपूर्वक विमोचन किया गया।
डॉ. देवदास ने कहा कि अपनी जन्मभूमि के इतिहास को सुरक्षित रखने का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। उन्होंने कहा कि वीरेन्द्र सिंह ठाकुर ने अपनी जन्मभूमि की गौरवगाथा को पुस्तक का रूप देकर अन्य साहित्यकारों एवं युवा कलमकारों के लिए प्रेरणादायक कार्य किया है।
– कपसीडीह में पहली बार हुआ कवि सम्मेलन
कार्यक्रम में ग्राम कपसीडीह में पहली बार कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने हास्य, व्यंग्य एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कवि सम्मेलन में पूर्व पंचायत इंस्पेक्टर नूतन लाल साहू, टीकमचंद सेन, प्रदीप साहू ‘कुँवरदादा’, मोतीलाल साहू, नवोदित कवि कुलेश्वर साहू, अनिता सुभाष देशमुख, आशाराम वर्मा तथा हास्य कवि कमलेश कौशिक कठलहा सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा।
– 100 से अधिक प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह में पुस्तक विमोचन के साथ स्कूली बच्चों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। वहीं शिक्षा, साहित्य, कला-संस्कृति, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक जनजागरण एवं सेवा कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले ग्राम के 100 से अधिक व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंद्रशेखर साहू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं जिला महामंत्री ने कहा कि “कपसीडीह की गौरवगाथा” पुस्तक आने वाली अनेक पीढ़ियों को गांव के संघर्ष, विकास, संस्कृति और उपलब्धियों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी।
– समारोह में ये अतिथि रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष गोपीराम ध्रुव, सोसायटी अध्यक्ष महेश साहू, सरपंच गंगा प्रसाद भारद्वाज, उपसरपंच बुधारू राम साहू, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष चैन सिंह ध्रुव सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
– आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रकाशन मंडल के मार्गदर्शक होमन राजा यादव, तथ्य संकलनकर्ता पुरुषोत्तम तारक, भूषण साहू, पिताम्बर गोस्वामी, राजेन्द्र साहू, दीपक साहू, रमेशर ध्रुव, ओंकार साहू, कुंजलाल साहू, युवा मित्र मंडली के मेघराज साहू, रीखम तारक, दुष्यंत साहू, पूर्व सरपंच द्वारिका राम साहू तथा ग्राम की प्रथम महिला सरपंच श्रीमती तुलसी सत्येंद्र साहू सहित अनेक ग्रामीणों का विशेष योगदान रहा।
समारोह ने कपसीडीह के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को नई पहचान देने के साथ-साथ अपनी जन्मभूमि के गौरव को साहित्य में संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई।