सीधी में विश्वविद्यालय स्थापना की मांग तेज, छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
80 साल की आजादी के बाद भी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों में जाने को मजबूर हैं विद्यार्थी

सीधी, मध्यप्रदेश। सीधी जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर जिले के छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपकर जिले में विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग की है। 9 अक्टूबर 2026 को तैयार किए गए ज्ञापन में विद्यार्थियों ने जिले में उच्च शिक्षा की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इस दिशा में ठोस पहल करने की अपील की है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सीधी जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां अधिकांश गरीब परिवार निवास करते हैं। जिले में विश्वविद्यालय नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर-दराज के जिलों अथवा अन्य प्रदेशों में जाना पड़ता है। इससे उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है।
छात्र-छात्राओं का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक विद्यार्थी बाहर जाकर पढ़ाई करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उन्हें या तो अपनी शिक्षा से वंचित होना पड़ता है या फिर अपनी रुचि के विपरीत विषयों का चयन करना पड़ता है।
गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का अभाव चिंता का विषय
ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबके विश्वास की भावना के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन सीधी जिले में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की उपलब्धता आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आजादी के 80 वर्ष बाद भी जिले में विश्वविद्यालय का अभाव विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक विकास के लिहाज से चिंता का विषय है।
प्रधानमंत्री से विश्वविद्यालय स्थापना की मांग
जिले के छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री से विनम्र आग्रह किया है कि सीधी में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक पहल की जाए, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को अपने जिले में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके। इससे गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
विद्यार्थियों ने विश्वास जताया है कि सीधी में विश्वविद्यालय की स्थापना से जिले में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा तथा युवाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। ज्ञापन के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने अपनी इस मांग पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।