सफलता की कहानी कस्टम हायरिंग सेंटर ने बदली बैगा महिलाओं की जिंदगी, बढ़ी आय तो मजबूत हुई आजीविका

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खेती और जंगल पर निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता दैहान स्वसहायता समूह

 

रिपोर्टर -सोहन श्याम

 

 

 

 

बजाग- डिंडौरी जिले के बजाग विकासखंड के ग्राम खपरीपानी की बैगा महिलाओं ने मेहनत, सामूहिक प्रयास और आजीविका मिशन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। ग्राम पंचायत खम्हेरा के दैहान स्वसहायता समूह की 13 महिला सदस्य आज कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। वर्ष 2013 से संचालित यह समूह बैगाचक महिला विकास समिति, संकुल चांडा से जुड़ा है।

कभी खेती और जंगल पर निर्भर रहने वाली इन महिलाओं के सामने सीमित आय के कारण परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। समूह की प्रत्येक सदस्य की मासिक आय लगभग 2 से 3 हजार रुपये तक सीमित थी। बैगा विकास परियोजना के अंतर्गत समूह को कस्टम हायरिंग सेंटर की सुविधा मिलने से आजीविका के नए अवसरों का द्वार खुला। लगभग 17 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली, थ्रेशर, नागर सहित कृषि उपयोगी उपकरणों के माध्यम से समूह किसानों को कृषि कार्यों के लिए मशीनरी उपलब्ध करा रहा है।

कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू होने के बाद समूह की महिलाओं की मेहनत रंग लाई और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्तमान में प्रत्येक सदस्य लगभग 15 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर रही है। बढ़ी हुई आमदनी ने परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब ये महिलाएं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आर्थिक निर्णयों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

 

हमारे लिए कस्टम हायरिंग सेंटर सिर्फ मशीनें नहीं, आत्मनिर्भरता का माध्यम है

 

दैहान स्वसहायता समूह की महिलाएं बताती हैं कि आजीविका मिशन और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से उन्हें अपनी मेहनत को आय में बदलने का अवसर मिला। कृषि यंत्रों की सुविधा से जहां क्षेत्र के किसानों को समय पर मशीनरी उपलब्ध हो रही है, वहीं समूह की महिलाओं के लिए नियमित आय का नया साधन विकसित हुआ है। कभी सीमित संसाधनों के सहारे जीवन चलाने वाली ये बैगा महिलाएं आज अपने आत्मविश्वास और परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।

’’दैहान स्वसहायता समूह की यह कहानी बताती है कि जब महिलाओं को अवसर, संसाधन और सामूहिक प्रयास का साथ मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार की तस्वीर बदल सकती हैं, बल्कि पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम होती हैं।’’

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