सीधी जिले में जर्जर भवन में ‘करंट’ के बीच कर्मचारी! बारिश में टपक रही छत, जान जोखिम में विद्युत व्यवस्थ

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कुसमी विद्युत केंद्र की बदहाली ने खोली विभागीय भर्राशाही की पोल — लाखों के उपकरण खतरे में, न बाउंड्रीवॉल न पर्याप्त संसाधन

 

प्राइड समाचार, सीधी।

 

कुसमी। सीधी जिले के मड़वास डीसी अंतर्गत कुसमी क्षेत्र में विद्युत विभाग की बदहाल व्यवस्थाओं ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस भवन से क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था संचालित होती है, वही भवन लंबे समय से जर्जर हालत में पड़ा है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपक रहा है और कर्मचारी इसी जोखिम भरे माहौल में विद्युत व्यवस्था संभालने को मजबूर हैं।

 

हालात ऐसे हैं कि एक तरफ छत से पानी टपक रहा है तो दूसरी तरफ विद्युत उपकरणों के बीच कर्मचारियों को काम करना पड़ रहा है। ऐसे में किसी भी समय शॉर्ट सर्किट या विद्युत दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

जर्जर भवन में जान हथेली पर रखकर ड्यूटी!

 

कुसमी विद्युत केंद्र का भवन लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण भवन के अंदर रखे उपकरण और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी सामग्री प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यही पानी किसी विद्युत उपकरण या ऑपरेटिंग सिस्टम में पहुंच गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

 

कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

 

जंगल क्षेत्र में विद्युत केंद्र, बाहर निकलते ही खतरा!

 

बताया जाता है कि विद्युत विभाग का यह भवन जंगली क्षेत्र में स्थित है। भवन के आसपास जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय स्तर पर कई बार भालू के पहुंचने की बात भी सामने आ चुकी है।

 

इसके बावजूद कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती। रात के समय फॉल्ट आने पर कर्मचारियों को अंधेरे और असुरक्षित वातावरण में बाहर निकलकर विद्युत व्यवस्था बहाल करनी पड़ती है।

 

बाउंड्रीवॉल तक नहीं, ट्रांसफार्मर के पास पहुंच रहे मवेशी

 

विद्युत केंद्र परिसर में बाउंड्रीवॉल नहीं होने के कारण मवेशियों का प्रवेश भी आसानी से हो जाता है। मवेशी पावर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरणों के आसपास तक पहुंच जाते हैं।

 

यह स्थिति केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि संभावित बड़े हादसे का खुला खतरा है।

 

यदि किसी मवेशी के साथ विद्युत दुर्घटना होती है या कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

 

बारिश में भीग रहे उपकरण, लाखों की संपत्ति पर संकट

 

जर्जर छत से टपकता पानी विद्युत उपकरणों और अन्य सामग्री के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। लगातार नमी और पानी के कारण उपकरण खराब होने की आशंका है।

 

सरकारी धन से खरीदे गए लाखों रुपये के उपकरण यदि विभागीय रखरखाव के अभाव में खराब होते हैं तो इसका नुकसान आखिर जनता के पैसे का ही होगा।

 

वाहन और जरूरी सामग्री की कमी से कर्मचारी परेशान

 

स्थानीय जानकारी के अनुसार फॉल्ट एवं मेंटेनेंस कार्य के लिए आवश्यक सामग्री और वाहन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रिपेयरिंग और मेंटेनेंस कार्य में आवश्यक संसाधनों की कमी के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

 

सवाल यह है कि बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने वाले कर्मचारियों के पास ही यदि पर्याप्त संसाधन नहीं होंगे तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल फॉल्ट कैसे सुधारेंगे?

 

हादसे का इंतजार कर रहा विभाग या कार्रवाई होगी?

 

कुसमी विद्युत केंद्र की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जर्जर भवन, टपकती छत, बाउंड्रीवॉल का अभाव, मवेशियों की आवाजाही, जंगली जानवरों का खतरा और संसाधनों की कमी—ये सभी व्यवस्थाओं की बदहाली की तस्वीर सामने रख रहे हैं।

 

सवाल सीधा है—क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद जागेंगे?

 

स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए अथवा नए भवन की व्यवस्था की जाए। साथ ही परिसर में बाउंड्रीवॉल का निर्माण, पर्याप्त वाहन, मेंटेनेंस सामग्री और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम तत्काल किए जाएं।

 

अब देखना यह होगा कि कुसमी विद्युत केंद्र की इस बदहाल व्यवस्था पर विभाग कब तक चुप्पी साधे रहता है और कार्रवाई हादसे से पहले होती है या हादसे के बाद।

 

प्राइड समाचार, सीधी

— जनहित में सवाल, जिम्मेदारों से जवाब की उम्मीद।

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