वर्षाकाल में वज्रपात से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

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सतर्कता और सावधानी से टल सकती हैं वज्रपात की दुर्घटनाएं: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

 

प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए मौसम की चेतावनियों का करें पालनः स्वास्थ्य विभाग*श

 

डिंडौरी, 27 जुलाई 2026

 

वर्षा ऋतु के दौरान आकाशीय बिजली (वज्रपात) की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डिण्डौरी ने जिलेवासियों से सतर्क रहने और वैज्ञानिक एवं सुरक्षित व्यवहार अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाकर वज्रपात से होने वाली जनहानि और दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मानसून के दौरान विशेष रूप से दोपहर एवं शाम के समय वज्रपात की घटनाएं अधिक होती हैं। ऐसे में गरज-चमक शुरू होते ही खुले स्थानों, खेतों, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों, टेलीफोन पोल, धातु के ढांचों तथा जल स्रोतों से तुरंत दूर हो जाना चाहिए। सुरक्षित भवन या पक्के आश्रय स्थल में शरण लेना सबसे सुरक्षित उपाय है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वज्रपात के दौरान ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, साइकिल अथवा अन्य खुले वाहनों का उपयोग न करें। बिजली के उपकरणों को मुख्य विद्युत आपूर्ति से अलग कर दें तथा अनावश्यक रूप से मोबाइल, टेलीविजन और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग करने से बचें। यदि खुले क्षेत्र में फंस जाएं और सुरक्षित भवन उपलब्ध न हो तो सबसे ऊंची वस्तु से दूर रहते हुए दोनों पैरों को पास-पास रखकर झुककर बैठें तथा जमीन पर न लेटें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों एवं संवेदनशील व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें तथा गरज-चमक समाप्त होने के बाद भी कम से कम 30 मिनट तक सुरक्षित स्थान पर ही रहें। यदि कोई व्यक्ति वज्रपात से प्रभावित हो जाए तो उसे तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराते हुए 108 एम्बुलेंस की सहायता से निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाएं, जहां उपचार की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वर्षाकाल में मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें, सतर्कता एवं सावधानी बरतें तथा स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने में सहयोग करें। जनजागरूकता और समय पर अपनाई गई सावधानियां ही वज्रपात से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

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