मुहर्रम पर इबादत, अकीदत और अमन का पैगाम

सिहावल में बड़े अदबो-एहतराम के साथ मनाया गया आशूरा, सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

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सिहावल | शाहिद खान

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में मुहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन आशूरा (10वीं मुहर्रम) शुक्रवार, 26 जून को अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। मुहर्रम इस्लामी वर्ष 1448 हिजरी का पहला महीना है, जो त्याग, सत्य, न्याय और बलिदान की याद दिलाता है। इस अवसर पर सिहावल जनपद क्षेत्र के विभिन्न गांवों एवं कस्बों सहित मुख्य रूप से सिहावल में मोहर्रम का पर्व धार्मिक श्रद्धा और शांति के वातावरण में संपन्न हुआ।

मुहर्रम का महीना विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। कर्बला के मैदान में सत्य, इंसाफ और मानवता की रक्षा के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को दुनिया भर के मुसलमान श्रद्धा के साथ याद करते हैं। आशूरा के दिन लोगों ने इबादत की, दुआएं मांगीं और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 10 मुहर्रम यानी आशूरा के दिन रोज़ा रखने का विशेष महत्व है। कई लोग 9वीं और 10वीं अथवा 10वीं और 11वीं मुहर्रम का रोज़ा रखकर इबादत करते हैं। इसे आत्मसंयम, नेक अमल और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है।

पर्व के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सिहावल तहसीलदार तथा सिहावल चौकी प्रभारी अपने दल-बल के साथ लगातार क्षेत्र में गश्त करते रहे। प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में मोहर्रम का पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की सतर्कता और बेहतर व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि पर्व के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। मुहर्रम का यह अवसर समाज को त्याग, धैर्य, सत्य और इंसानियत के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

कर्बला का संदेश आज भी प्रासंगिक है—अन्याय के सामने झुकना नहीं, बल्कि सत्य और न्याय के लिए डटकर खड़े रहना ही इमाम हुसैन की शहादत का सबसे बड़ा संदेश माना जाता है।

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