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सरई टोला में दिखा GPS टैग वाला गिद्ध, ग्रामीणों में कौतूहल; वन विभाग ने बताया संरक्षण अभियान का हिस्सा

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जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव

 

 

डिंडोरी। जिले के अमरपुर जनपद अंतर्गत भेसवाहि सरई टोला और उमरिया गवारी टोला में इन दिनों एक अनोखे मेहमान ने ग्रामीणों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। गांव में अचानक एक ऐसा गिद्ध दिखाई दिया, जिसके पैरों में नंबर वाला टैग और शरीर पर GPS ट्रैकिंग डिवाइस लगा हुआ था। पक्षी को इस रूप में देखकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई इसे रहस्यमयी पक्षी मान रहा था, तो कुछ इसे किसी विशेष निगरानी मिशन से जुड़ा बता रहे थे।

 

ग्रामीणों के अनुसार यह गिद्ध करीब दो दिनों तक भेसवाहि सरई टोला और उमरिया गवारी टोला क्षेत्र में मंडराता और बैठता रहा। इसके चलते गांव में उत्सुकता के साथ हल्की दहशत का माहौल भी बन गया। मामले की जानकारी प्रशासन और वन विभाग को दी गई, जिसके बाद वन अमला मौके पर पहुंचा और पक्षी का निरीक्षण किया।

 

वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों को बताया कि यह कोई सामान्य पक्षी नहीं, बल्कि विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी गिद्ध प्रजाति का हिस्सा है। इसके संरक्षण और निगरानी के उद्देश्य से पैरों में पहचान के लिए टैग लगाया गया है, जबकि शरीर पर लगा उपकरण कैमरा नहीं बल्कि GPS ट्रैकिंग डिवाइस है। इस डिवाइस की मदद से विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि गिद्ध किस क्षेत्र में जा रहा है, कहाँ ठहर रहा है और उसका व्यवहार कैसा है।

 

वन विभाग के अनुसार यह गिद्ध सिवनी जिले की ओर से इस क्षेत्र में पहुंचा था। माना जा रहा है कि भोजन की तलाश, मौसम परिवर्तन या प्राकृतिक भ्रमण के दौरान यह डिंडोरी जिले के सरई टोला क्षेत्र तक आ पहुंचा। हालांकि दो दिन क्षेत्र में रुकने के बाद वह आगे निकल गया।

 

गिद्ध के शरीर पर लगे उपकरण और पैरों में नंबर वाला टैग देखकर ग्रामीणों में काफी उत्सुकता देखने को मिली। गांव के बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक इस पक्षी को देखने पहुंच गए। कई ग्रामीणों ने पहली बार इतनी नजदीक से किसी गिद्ध को देखा, वह भी आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम के साथ।

 

विशेषज्ञों के अनुसार गिद्ध प्रकृति के लिए बेहद महत्वपूर्ण पक्षी हैं। ये मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या तेजी से घटी है। ऐसे में टैगिंग और GPS मॉनिटरिंग जैसी तकनीकें इनके संरक्षण के लिए बेहद अहम साबित हो रही हैं।

 

इस घटना ने सरई टोला और आसपास के ग्रामीणों के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। जिस पक्षी को पहले ग्रामीण रहस्यमयी मानकर डर रहे थे, वही अब क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक के उपयोग का एक जीवंत उदाहरण बन गया है।

 

 

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