समय से पहले स्कूलों में लटके ताले, ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव
या थोड़ा और धारदार अंदाज़ में:
भगवान भरोसे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था: तय समय से पहले बंद मिले सरकारी स्कूल
भगवान भरोसे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था: तय समय से पहले बंद मिले सरकारी स्कूल
डिंडोरी के दो शासकीय विद्यालयों में समय पूर्व ताला लगने से मचा हड़कंप, पढ़ाई व्यवस्था पर उठे सवाल
डिंडोरी। सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। डिंडोरी जिले के विकासखंड क्षेत्र में संचालित दो शासकीय विद्यालयों में निर्धारित समय से पहले ताला लगने का मामला सामने आया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।
जानकारी के अनुसार, विक्रमपुर शासकीय कन्या हाई स्कूल और एकीकृत शासकीय नवीन माध्यमिक शाला मेर में स्कूल समय से पहले बंद पाए गए। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विक्रमपुर कन्या हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षिकाएं दोपहर करीब 2:30 बजे ही विद्यालय बंद कर चली गईं, जबकि एकीकृत शासकीय नवीन माध्यमिक शाला मेर में करीब 12 बजे ही ताला लटक गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, विद्यालय परिसर में प्रदर्शित मोबाइल नंबर पर संपर्क कर शिक्षक इंदर सिंह उइके को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद वे विद्यालय पहुंचे और स्कूल खोला गया। वहीं, प्राथमिक शिक्षक रमेश टेकाम ने समय से पहले विद्यालय छोड़ने की वजह रिश्तेदारी में आयोजित दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होना बताई।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि कुछ जिम्मेदार शिक्षक और प्रधान पाठक तक विद्यालय के निर्धारित संचालन समय को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब स्कूल संचालन की मूल व्यवस्था पर ही जिम्मेदारों की पकड़ कमजोर है, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी विद्यालय ही गांव के बच्चों के भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं। यदि इन विद्यालयों में समय पालन, अनुशासन और जवाबदेही नहीं होगी, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा।
अब क्षेत्र में शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वास्तविक स्थिति सामने लाने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी लापरवाही पर रोक नहीं लगी, तो ग्रामीण अंचल की शिक्षा व्यवस्था और अधिक बदहाल हो सकती है।