सिहावल का सन्नाटा चीख उठा: काग़ज़ी तरक़्क़ी के साए में बदइंतज़ामी का साम्राज्य

प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी, सिहावल रिपोर्ट : शाहिद खान
सिहावल की सरज़मीं पर अब लापरवाही सिर्फ़ एक शिकायत नहीं, बल्कि एक कड़वी हक़ीक़त बन चुकी है। यहाँ योजनाओं की फेहरिस्त तो लंबी है, मगर उनके असर का कहीं अता-पता नहीं। दफ्तर मौजूद हैं, लेकिन ना मुकम्मल इमारतें हैं, ना ज़रूरी अमला। करोड़ों की जल योजनाएं कागज़ों में बहती नज़र आती हैं, जबकि आवाम बूंद-बूंद को तरस रही है। हालात ये हैं कि मज़दूर बिना सेफ्टी इंतज़ाम के ऊँचाई पर जान जोखिम में डालते हैं, और कहीं अधूरे निर्माण बच्चों के लिए मौत का कुआँ साबित हो रहे हैं।
कानून-ओ-इंतज़ाम की सूरत-ए-हाल भी कम संगीन नहीं। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उसका असर सड़कों पर नदारद है। हेलमेट चेकिंग की रस्म अदायगी तो होती है, मगर नाबालिग रफ़्तार के खिलाफ कोई सख्ती नहीं दिखती। अस्पताल महज़ रेफरल सेंटर बनकर रह गया है, जहाँ इलाज से ज़्यादा मरीज़ों को बाहर भेजने का सिलसिला चलता है। ब्लॉक मुख्यालय में दफ्तर तो हैं, मगर अफसरों से लेकर चपरासी तक का ठिकाना ज़िला मुख्यालय बन चुका है, जिससे आम जनता को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
इधर न्याय और प्रशासन की तस्वीर भी किसी खंडहर से कम नहीं। नई इमारतें तैयार खड़ी हैं, मगर अदालतें अब भी जर्जर भवनों में चल रही हैं, जहाँ लोग घंटों अपने नाम की पुकार का इंतज़ार करते रहते हैं। बाबू अगली तारीख थमाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेते हैं, जबकि राजस्व विभाग की फाइलें महीनों से धूल फांक रही हैं। सड़कों पर ना स्पीड ब्रेकर हैं, ना चेतावनी बोर्ड, और लोक निर्माण विभाग की खामोशी सब कुछ बयां कर रही है। जल जीवन मिशन भी प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रहा है, और जनप्रतिनिधियों की खामोशी या बयानबाज़ी अब आवाम के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा महसूस होती है।
प्राइड कदम हिंदी समाचार एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी ( मध्य प्रदेश)