खंडहर कांड पर सियासत तेज, शिवसेना-एनएसयूआई ने उठाए सवाल

0 297


सीधी | विशेष संवाददाता
सीधी जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों को ‘खंडहर’ घोषित कर गिराए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी के हटने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। अब शिवसेना और एनएसयूआई ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दोनों संगठनों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित कार्रवाई हो सकती है। उनका आरोप है कि बिना ठोस कारण और तकनीकी जांच के गरीबों के मकानों को ‘खंडहर’ घोषित कर गिरा दिया गया, जो गंभीर लापरवाही का मामला है। संगठनों ने यह भी कहा कि सिर्फ कलेक्टर को हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले में शामिल सभी जिम्मेदार अधिकारियों की जांच होनी चाहिए।
शिवसेना और एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों पर दबाव बनाकर घर खाली करवाए गए। बिना उचित सर्वे के मकानों को ध्वस्त किया गया, जिससे गरीब परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कई अधिकारी इस प्रक्रिया में शामिल थे, तो कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक ही क्यों सीमित रही।
संगठनों ने मांग की है कि सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, प्रभावित 7 परिवारों के 58 लोगों को तत्काल मुआवजा दिया जाए और पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए।
इधर, जिन परिवारों के मकान गिराए गए हैं, वे अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकारी योजना, जो उन्हें आश्रय देने के लिए बनाई गई थी, वही उनके लिए संकट बन गई है।
मामले को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह कार्रवाई केवल तबादले तक सीमित रहेगी या जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होगी? क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा?
फिलहाल, ‘खंडहर कांड’ को लेकर जिले में सियासत गरमाई हुई है और जनता की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

Web TV

अगली ख़बर

Leave a comment