नेशनल हाईवे पर बसा अमिलिया बाजार बदइंतज़ामी का आईना, हाट नहीं, शौचालय नहीं, नल-जल योजना फेल — करोड़ों की पाइपलाइन दबी, अफसरों की आंख बंद, जनता धूप में खड़ी

सीधी/सिहावल विकासखंड का अमिलिया बाजार नेशनल हाईवे पर बसा होने के बावजूद बदइंतज़ामी का ऐसा नमूना बन गया है, जहां विकास के दावे कागज़ों में चमकते हैं और ज़मीन पर अव्यवस्था धूल फांकती नज़र आती है। वर्षों से मांग उठती रही कि साप्ताहिक हाट के लिए व्यवस्थित जगह तय की जाए, मगर आज तक न हाट की जगह तय हुई, न महिलाओं के लिए शौचालय बना, न ही कोई ढंग का यात्री प्रतीक्षालय तैयार हो सका। बाज़ार आने वाली महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण खुले आसमान के नीचे इंतज़ार करने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर फाइलों में विकास का लेखा-जोखा पूरा दिखाकर इत्मीनान से बैठे हैं।
हैरानी की इंतिहा तब दिखाई देती है जब शासकीय महाविद्यालय सिहावल को ऐसी जगह बना दिया गया जहां सुविधा कम और परेशानी ज्यादा है। करीब चार करोड़ की लागत से बनी नई बिल्डिंग तैयार होने के बाद भी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी और छात्र-छात्राएं खुद ही व्यवस्था करके परीक्षा देने को मजबूर हुए। दूसरी ओर तहसील प्रांगण में जर्जर भवन में एसडीएम कार्यालय संचालित हो रहा है, जबकि कुछ ही दूरी पर नई इमारत बनकर तैयार खड़ी है और उद्घाटन के इंतजार में धूल खा रही है। छात्र-छात्राएं बसों के इंतज़ार में धूप और धूल में खड़े रहते हैं, जबकि यात्री प्रतीक्षालय ऐसी जगह बना दिया गया जहां उसकी जरूरत ही नहीं थी। लोगों का कहना है कि यहां योजना पहले बनती है, ज़रूरत बाद में देखी जाती है।
सबसे बड़ा उदाहरण नल-जल योजना की विफलता के रूप में सामने आ रहा है। अमिलिया-बीछी रोड के किनारे करोड़ों रुपये खर्च कर पाइपलाइन बिछा दी गई, लेकिन कई जगहों पर अब तक नियमित पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी, जिससे लोगों में नाराज़गी है। हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क के नीचे पाइपलाइन डाली गई, उसी मार्ग पर डबल लेन निर्माण का काम प्रस्तावित है। ऐसे में सड़क चौड़ी होने पर पूरी पाइपलाइन उखड़ने की आशंका है, जिससे साफ दिखाई देता है कि योजना बिना समन्वय और बिना दूरदर्शिता के बनाई गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नल-जल योजना यहां सुविधा कम और सरकारी लापरवाही का सबूत ज्यादा बन गई है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या गुणवत्ता जांच सिर्फ कागज़ों में होती है, या फिर फाइलें प्रतिशत और पहचान देखकर पास होती हैं। अमिलिया और सिहावल की जनता का कहना है कि यहां विकास कम, दिखावा ज्यादा और जवाबदेही सबसे कम दिखाई देती है — और अब यही सवाल सीधे प्रशासन की कार्यप्रणाली और नीयत पर खड़े हो रहे हैं।