भाजपा के जीवेंद्र शुक्ला पूर्व मंडल मंत्री ने यू जी सी बिल के बिरोध में दिया बगावती इस्तीफा

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सीधी (राकेश शर्मा) जिस भारतीय जनता पार्टी को कभी जमीन पर खड़ा करने के लिए कार्यकर्ताओं ने खून-पसीना बहाया, उसी पार्टी से आज उसके पुराने सिपाही आहत, अपमानित और निराश होकर बाहर निकलने को मजबूर हैं।

जीवेंद्र शुक्ला मंडल मंत्री ने भी यूजीसी बिल के विरोध में अपना पद त्यागते हुए इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले कुबरी बूथ के पूर्व अध्यक्ष उमेश कुमार शुक्ला ने UGC बिल के विरोध में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर संगठन और सत्ता—दोनों के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। इन लोगों का कहना है कि“जब झंडा उठाने वाला कोई नहीं था, तब हम थे”। अपने तीखे बयान में उमेश शुक्ला ने भाजपा नेतृत्व पर सीधा प्रहार करते हुए कहा— “जब भाजपा को पहचान तक नहीं थी, तब हम जैसे कार्यकर्ताओं ने खुलकर झंडा उठाया। आज जब केंद्र से लेकर प्रदेश तक सत्ता मिल गई है, तो वही पार्टी अपना असली चेहरा दिखा रही है।”

 

जिवेन्द्र शुक्ला ने आरोप लगाया कि UGC बिल केवल एक कानून नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की मानसिक स्थिति को कमजोर करने की साजिश है। “यह बिल हमारे बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश है। यह शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक विनाश की दिशा में कदम है।”सत्ता में बैठे सवर्ण चेहरे पूरी तरह मौन-सबसे तीखा वार करते हुए शुक्ला ने कहा कि भाजपा के भीतर बैठे तथाकथित बड़े चेहरे इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश हैं। पार्टी के सवर्ण विधायक, सांसद और विंध्य से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला तक एक शब्द नहीं बोल रहे। इससे साफ है कि अब भाजपा को सवर्ण समाज की जरूरत नहीं रही।

 

“विचारधारा नहीं, अब सिर्फ सत्ता”-जीवेंद्र शुक्ला का आरोप है कि भाजपा अब उस विचारधारा को बढ़ावा दे रही है जो समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रही है।यह वही पार्टी नहीं रही जिसके लिए हमने संघर्ष किया था। अब विचार नहीं, सिर्फ सत्ता बचाने की राजनीति हो रही है।

 

स्पष्ट ऐलान—अब कोई पार्टी कार्य नहीं,अपने इस्तीफे में उमेश शुक्ला ने साफ शब्दों में लिखा है कि इस घटनाक्रम से मेरा मन पूरी तरह व्यथित है। आज के बाद पार्टी का कोई भी कार्य नहीं करूंगा।उन्होंने इस्तीफे में UGCBlackBill लिखकर सरकार के फैसले के खिलाफ खुला विरोध दर्ज कराया।

 

भाजपा के लिए चेतावनी या अनदेखी-एक पूर्व बूथ अध्यक्ष और मंडल मंत्री जीवेंद्र शुक्ला का इस तरह खुलेआम बगावती तेवर अपनाना बताता है कि नाराज़गी केवल विपक्ष में नहीं, संगठन के भीतर भी सुलग रही है।अब बड़ा सवाल यह है—क्या भाजपा नेतृत्व इस आग को समय रहते बुझाएगा या जमीनी कार्यकर्ताओं की यह नाराज़गी आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विस्फोट बनेगी? यह सब देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि यूजीसी बिल ने भाजपा की जमीनी रीढ़ को तोड़ने का काम अवश्य किया है?यह सब जानने के लिए बने रहिए प्राइड इंडिया न्यूज़ के साथ।

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