शाहपुर क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में हरे-भरे पेड़ों का खुलेआम कत्लेआम, फलदार वृक्षों पर मंडरा रहा अस्तित्व का संकट

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जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव कि रिपोर्ट

 

 

शहपुर। जिले के शाहपुर क्षेत्र के आसपास के ग्रामीण अंचलों में पर्यावरण संरक्षण के दावों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। एक ओर सरकार द्वारा “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शाहपुर क्षेत्र में आम, जामुन जैसे बहुमूल्य फलदार वृक्षों की बिना अनुमति अंधाधुंध कटाई जोरों पर जारी है।

 

ग्रामीण इलाकों में खुलेआम हो रही इस अवैध कटाई के कारण हरियाली तेजी से खत्म होती जा रही है। खासतौर पर आम और जामुन जैसे मौसमी व फलदार पेड़, जो न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और पोषण का भी सहारा होते हैं, आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह पेड़ों की कटाई का सिलसिला चलता रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में नई पीढ़ी को इन पेड़ों की पहचान केवल तस्वीरों के माध्यम से ही करानी पड़ेगी। इससे न सिर्फ पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा, बल्कि तापमान वृद्धि, जल संकट और जैव विविधता पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

 

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग व जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और ग्रामीण क्षेत्रों में संरक्षण के साथ-साथ व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की यह अमूल्य धरोहर बचाई जा सके।

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