भंडारगोंदी: श्री विट्ठल-रुखमणी मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटाने की गूंज, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ पांढुरना
पांढुरना: ग्राम भंडारगोंदी में श्री विट्ठल-रुखमणी मंदिर की शासकीय भूमि पर बने एक कच्चे टीन शेड को लेकर विवाद अब जिला प्रशासन की चौखट तक पहुँच गया है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मंदिर परिसर के विकास में आ रहे अवरोध को हटाने की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
ग्रामवासियों का कहना है कि श्री विट्ठल-रुखमणी मंदिर के सामुदायिक भवन के पीछे स्थित शासकीय भूमि पर महादेव पिता नारायण बंदे और नामदेव पिता नारायण बंदे द्वारा पिछले कई वर्षों से कच्चा टीन शेड बनाकर अतिक्रमण किया गया है। मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष होने वाले धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए यहाँ एक ‘किचन शेड’ का निर्माण होना प्रस्तावित है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा नोटिस जारी होने और प्रस्ताव पारित होने के बावजूद अब तक यह शेड नहीं हटाया गया है।
प्रमुख ग्रामीणों ने उठाई आवाज
अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर सरपंच सुरेंद्र वाडिवा के साथ क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने मोर्चा खोला है। आवेदन प्रस्तुत करने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं: विलास धोटे, महादेव रेवतकर, मुरलीधर गुडधे, सुनील बेलखड़े, प्रकाश डोईजोड, संजय गायकी, भूषण बेलखड़े,उमेश नानोटकर
बंदे परिवार की व्यथा: “रोजी-रोटी का सवाल”
वहीं, दूसरी ओर अनावेदक महादेव बंदे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके पास ‘आबादी भूखंड धारक’ का वैध प्रमाण पत्र है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि उनका परिवार लोहारी (लोहे का काम) कर अपना भरण-पोषण करता है। यदि उन्हें यहाँ से उजाड़ा गया, तो उनके तीन पुत्रों और पूरे परिवार के सामने जीविका का संकट खड़ा हो जाएगा और वे सड़क पर आ जाएंगे। बंदे परिवार ने इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए जरूरत पड़ने पर कोर्ट के माध्यम से न्याय मांगने की बात कही है।
निष्कर्ष
फिलहाल, एक ओर आस्था और मंदिर का विकास है, तो दूसरी ओर एक परिवार की आजीविका। अब पूरा मामला प्रशासन के पाले में है। देखना होगा कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है।