पांढुरना जनपद में मनरेगा का ‘महाघोटाला’: मशीनों ने छीना मजदूरों का हक, कागजों में खिला ‘नंदनवन’!

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संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ पांढुरना

पांढुरना | जनपद पंचायत का मनरेगा विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार के काले कारनामों को लेकर सुर्खियों में है। शासन द्वारा किसान और मजदूरों के हित में चलाई जा रही योजनाओं को विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और बिचौलियों ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। आलम यह है कि धरातल पर काम कम और कागजों पर गबन ज्यादा नजर आ रहा है।
मजदूरों की मजदूरी पर मशीनी ‘डाका’
सबसे गंभीर मामला खेत तालाब योजना में सामने आया है। नियमों के अनुसार, तालाबों की खुदाई मजदूरों द्वारा की जानी चाहिए ताकि गरीब परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिल सके। लेकिन पांढुरना में नियमों को ताक पर रखकर रातों-रात जेसीबी मशीनों से तालाब खोद दिए गए। आरोप है कि मजदूरों के हक पर मशीनी डाका डालकर, फर्जी मस्टरोल के जरिए लाखों रुपये की राशि डकार ली गई है।
नंदनवन योजना: बिना काम के ही हो गया लाखों का भुगतान
भ्रष्टाचार की हदें तो नंदनवन योजना में पार हो गई हैं। यहाँ मशीनों की भी जरूरत नहीं समझी गई, बल्कि बिना किसी कार्य के ही फर्जी बिलों का खेल खेला गया। आरोप लग रहे हैं कि कई जगहों पर योजना से संबंधित कोई कार्य हुआ ही नहीं, लेकिन कागजों में उसे पूर्ण दिखाकर सामग्री के नाम पर लाखों रुपये का गबन कर लिया गया। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने की खुली लूट है।
पात्र किसान दर-दर भटकने को मजबूर
हैरानी की बात यह है कि जिस पात्र किसान ने पसीना बहाकर मानकों के अनुसार कार्य पूर्ण किया है, वह आज अपने भुगतान के लिए जनपद पंचायत के चक्कर काट रहा है। वहीं दूसरी ओर, ऐसे फर्जी ‘हितग्राही’ सक्रिय हैं जिनका मकसद केवल सरकारी पैसा हड़पना है और जिन्हें अधिकारियों का पूरा संरक्षण प्राप्त है।
पत्रकारिता का धर्म: अब तो जागिए हुक्मरान!
क्षेत्र का किसान अपने खेतों में व्यस्त है, उसके पास आंदोलन करने का समय नहीं है। उनकी इसी खामोशी का फायदा उठाकर विभाग में लूट मची है। यह रिपोर्ट उन सोए हुए उच्च अधिकारियों को जगाने के लिए है जो एअरकंडीशन कमरों में बैठकर ‘ऑल इज वेल’ की रिपोर्ट भेज रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या शासन इन कार्यों का भौतिक सत्यापन कराएगा? क्या उन भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज गिरेगी जिन्होंने बिना काम के ही लाखों के बिल पास कर दिए? पांढुरना की जनता अब जवाब मांग रही है।

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