अनजान लोगों से सोशल मीडिया पर दोस्ती न बढ़ाये – डीएसपी

खुसरूपुर -डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के खतरे को देखते हुए खुसरूपुर प्रखंड के गोविंदपुर में एक वृहद साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन एसडीपीओ अवधेश कुमार एवं वरिष्ठ पत्रकार वीएन चौबे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया ।इस कार्यक्रम का आयोजन प्रेम यूथ फाउंडेशन के माध्यम से किया गया, जिसमें फतुहा एसडीपीओ अवधेश कुमार के साथ-साथ खुसरूपुर थाना के एसआई शशांकी कुमारी,उपस्थित रही। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में इंटर्न ने भाग लिया और साइबर अपराध जैसे गंभीर व समसामयिक विषय पर गहन संवाद किया गया।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि साइबर अपराध केवल तकनीक से नहीं, बल्कि डर और लालच जैसी मानवीय कमजोरियों का फायदा उठाकर अंजाम दिए जाते हैं। साइबर सेल की टीम के उन सदस्यों ने, जो प्रतिदिन जमीनी स्तर पर साइबर अपराध से जुड़ी चुनौतियों से जूझते हैं, अपने वास्तविक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आम नागरिक, विशेषकर युवा वर्ग, थोड़ी सी असावधानी के कारण साइबर ठगों के जाल में फँस जाते हैं और किस तरह समय रहते सतर्कता बरतकर बड़े आर्थिक और मानसिक नुकसान से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। छात्रों को मोबाइल और कंप्यूटर सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखने, एंटीवायरस के माध्यम से लगातार स्कैन करने, अनजान एपीके फाइल या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, प्राइवेसी और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स को ऑन रखने तथा सुरक्षित ब्राउज़िंग आदतें अपनाने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि भले ही वॉच हिस्ट्री बंद कर दी जाए, फिर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों की निगरानी संभव है, क्योंकि आज के दौर में डेटा ही सबसे बड़ा ईंधन बन चुका है। साइबर विशेषज्ञों ने चेताया कि इसी कारण साइबर अपराध अब एक संगठित पेशा बनता जा रहा है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और यहां तक कि साइबर आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। ऐसे में युवाओं का जागरूक होना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
इस अवसर पर एसडीपीओ अवधेश कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए साइबर क्राइम से जुड़ी वास्तविक घटनाओं का उल्लेख किया और उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने एथिकल हैकिंग को एक सकारात्मक, सामाजिक रूप से उपयोगी और भविष्य उन्मुख करियर विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 20 के अंतर्गत सभी विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप अनिवार्य है। ऐसे में डिजिटल लिटरेसी, साइबर सिक्योरिटी और एथिकल हैकिंग के क्षेत्र में इंटर्नशिप कर युवा न केवल तकनीकी दक्षता हासिल कर सकते हैं, बल्कि स्वयं और अपने आसपास के समाज को साइबर अपराध से सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। नीतीश कुमार ने ऐसे कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए छात्रों से जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील डिजिटल नागरिक बनने की अपील की।साथ ही छात्रों को यह भी जानकारी दी गई कि किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत करें और साइबर थाना या नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएँ। इसके अलावा बिहार पुलिस के आर्थिक अपराध इकाई के टोल-फ्री नंबर 1930 पर तुरंत कॉल कर वित्तीय नुकसान को रोका जा सकता है। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सामुदायिक पुलिस रहा, जिसमें यह बताया गया कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब समाज स्वयं सतर्क होगा और हर नागरिक की भूमिका निभाएगा, तभी साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। पत्रकार वीएन चौबे ने युवाओं से आह्वान किया कि डर , लालच और भय को त्याग कर हम सायबर ठगी से बच सकते है । डिजिटल आरेस्ट ,सेक्स स्टॉकशन गैंग काफी सक्रिय है कोई भी कॉल आये तो सावधान हो जाये और पुलिस को सूचित करें ।
कार्यक्रम का सफल संचालन फाउंडेशन द्वारा किया गया, जिसमें ने विस्तार से सायबर सुरक्षा पर बताया , गांधीवादी प्रेम जी ने कहा कि पूरे बिहार में फाउंडेशन डिजिटल लिट्रेसी एवं सायबर सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलायेगा । कुमार गुप्ता, प्रो मुकेश कुमार मधुकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंततः यह कार्यक्रम छात्रों के लिए केवल जानकारी का माध्यम नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल रूप से जिम्मेदार, सतर्क और सशक्त नागरिक बनाने की दिशा में एक मजबूत और सार्थक पहल साबित हुआ। मौके पर सुनील कुमार, अजय राज, विकाश कुमार, हिमांशु शर्मा, स्नेहा कुमारी, अंजली कुमारी, संजना कुमारी, जनत प्रवीण समेत तीन सौ युवाओ ने भाग लिया