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सीधी में शिक्षा का मंदिर बना दहशत का अड्डा: मीडिया कर्मी को कमरे में बंद कर हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी, प्रभारी शिक्षक पर गंभीर आरोप

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सीधी जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली एक खतरनाक और सनसनीखेज खबर सामने आई है। एक ओर सरकार बच्चों के भविष्य को संवारने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में अनुशासन और सुरक्षा की स्थिति सवालों के घेरे में आ गई है।

मामला विकासखंड रामपुर नैकिन अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय शंकरपुर का है, जहां पदस्थ माध्यमिक शिक्षक एवं संस्था प्रभारी शिव प्रसाद साकेत की दबंगई खुलकर सामने आई है।

सवाल पूछना पड़ा भारी

जानकारी के अनुसार, मीडिया कर्मी तेज बहादुर सिंह जब स्कूल समय में बच्चों के सड़क पर घूमने को लेकर सवाल करने विद्यालय पहुंचे, तो प्रभारी शिक्षक आपा खो बैठे। सवाल का जवाब देने के बजाय उन्होंने उल्टा मीडिया कर्मी से ही पूछ लिया—

“आपके पास मुझसे सवाल पूछने का कोई लिखित आदेश है?”

कमरे में बंद कर दी धमकी

यहीं से मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि प्रभारी शिक्षक मीडिया कर्मी को कार्यालय के अंदर बुलाकर दरवाजा बंद कर लिया और खुलेआम हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी दी। जहां बच्चों को ज्ञान और संस्कार मिलना चाहिए, वहां डर और धमकी का माहौल बना दिया गया।

अधिकारियों को दी गई सूचना

स्थिति बिगड़ती देख मीडिया कर्मी ने कार्यालय के अंदर से ही

👉 जिला शिक्षा अधिकारी पवन सिंह,

👉 ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अवध शरण पांडे,

👉 संकुल प्राचार्य नागेंद्र कुमार पांडे

को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद ही कार्यालय का दरवाजा खोला गया।

पहले भी विवादों में रहे प्रभारी शिक्षक

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभारी शिक्षक अक्सर विद्यालय से नदारद रहते हैं और उनका व्यवहार पहले भी विवादों में रहा है। पूर्व में मीडिया कर्मियों से अभद्रता के मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

इतना ही नहीं, ग्रामीणों के अनुसार 17 जनवरी 2026 को शिक्षा विभाग की टीम जब जांच के लिए विद्यालय पहुंची, तब भी प्रभारी शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जबकि ऑनलाइन हाजिरी दर्ज थी।

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

👉 क्या शिक्षा विभाग ऐसे दबंग और लापरवाह प्रभारी शिक्षक पर सख्त कार्रवाई करेगा?

👉 या फिर यह गंभीर मामला भी फाइलों और कागजों में दबाकर भुला दिया जाएगा?

फिलहाल यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर बच्चों और समाज के भविष्य की जिम्मेदारी किन हाथों में है।

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