अपर नर्मदा बांध के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश, जल निगम का निर्माण कार्य रुकवाया

रिपोर्टर: सोहन श्याम | बजाग, डिंडोरी
गाड़ासरई/बजाग (डिंडोरी) — जिले में प्रस्तावित अपर नर्मदा बांध (शोभापुर) परियोजना को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज़ होता जा रहा है। सरकार द्वारा सिंचाई, बिजली, रोजगार और पेयजल की समस्या के समाधान के उद्देश्य से इस परियोजना को स्वीकृति दी गई है और भू-अर्जन की प्रक्रिया भी जारी है, लेकिन डूब प्रभावित ग्रामीण शुरू से ही इसका विरोध कर रहे हैं।

इसी क्रम में जल निगम द्वारा बनाए जा रहे पानी टंकी के निर्माण कार्य का ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध किया और कार्यस्थल पर पहुंचकर काम रुकवा दिया। विरोध के दौरान ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद तहसीलदार भरत सिंह बट्टे मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।

ग्रामीणों का कहना है कि जब शासन-प्रशासन द्वारा डूब प्रभावित गांवों में मनरेगा, आवास योजना सहित सभी शासकीय निर्माण कार्य बंद कर दिए गए हैं, तो ऐसे में पानी टंकी का निर्माण किस उद्देश्य से किया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब भविष्य में उन्हें यहां रहने ही नहीं दिया जाएगा, तो पानी टंकी किसके लिए बनाई जा रही है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह निर्माण कार्य कलेक्टर डिंडोरी के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत है और इसे सरकारी धन के दुरुपयोग की संज्ञा दी। इसके बाद थाना प्रभारी, तहसीलदार और ठेकेदार की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कर कार्य पर रोक लगाई गई।
गौरतलब है कि डिंडोरी जिले में अपर नर्मदा, लोवर नर्मदा, अपर बुढनेर, अंडई, बिठलदेह सहित आधा दर्जन से अधिक बांध परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनके चलते दर्जनों गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन किया जा रहा है। कई ग्राम पंचायतों ने पेसा एक्ट के तहत बांध के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किए हैं, इसके बावजूद आदिवासी बहुल क्षेत्र में बांध निर्माण को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इनका कहना है—
“जब शासन ने डूब प्रभावित गांवों में रोजगार और आवास योजनाएं बंद कर दी हैं, तो पानी टंकी का निर्माण किसके लिए किया जा रहा है?”
— उपेंद्र कोरी, ब्लॉक अध्यक्ष, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी
“मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं। ठेकेदार और ग्रामीणों को समझाया गया है। फिलहाल कार्य बंद करा दिया गया है।”
— भरत सिंह बट्टे, तहसीलदार