दैनिक आध्यात्मिक समाचार: सहिष्णुता ही सबसे बड़ी शक्ति

पांढुरना संवाददाता- निलेश कलस्कर जिला ब्युरो चिफ
वृंदावन डेस्क — पूज्य महाराज श्री हित प्रेमानंद जी ने सत्संग संवाद के दौरान भक्तों की एक बड़ी जिज्ञासा का समाधान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपमान होने पर मौन रहना कमजोरी का संकेत नहीं है।
मुख्य बिंदु:
प्रारब्ध का नाश: महाराज जी के अनुसार, जब कोई बुरा बोलता है, तो वह अनजाने में आपके पापों को नष्ट कर रहा होता है।
पुण्य का हस्तांतरण: अपमान करने वाला व्यक्ति अपना पुण्य आपको दे देता है और आपके पाप स्वयं ग्रहण कर लेता है।
साधना का मार्ग: ऐसी स्थिति में क्रोध करने के बजाय ‘राधा-राधा’ नाम का जप करते हुए आगे बढ़ना ही सच्ची जीत है।
संपादकीय टिप्पणी: “क्षमा वीरों का आभूषण है। जो सहता है, वह ईश्वर की दृष्टि में विजेता बनता है।”