पांढुर्णा रेलवे स्टेशन: हाई-क्लास दिखावा, ट्रेनें नदारद!

अमृत भारत योजना के तहत भव्य विकास, लेकिन 7 लाख यात्रियों को सुपरफास्ट स्टॉपेज का इंतजार; स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर फूटा आक्रोश
पांढुर्णा (निलेश कलसकर, जिला ब्युरो चिफ)।
पांढुर्णा रेलवे स्टेशन को केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत योजना’ के तहत एक हाई-क्लास स्टेशन का दर्जा देने के लिए तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। स्टेशन का सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक पार्किंग, आलीशान पार्क और मुख्य द्वार का निर्माण भव्य तरीके से किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
मगर, इन सभी आलीशान विकास कार्यों के बावजूद, स्टेशन पर सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव (स्टॉपेज) की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह विकास मात्र ‘दिखावा’ है, जब तक मुख्य सुविधा यानी ट्रेन स्टॉपेज बहाल नहीं किए जाते, तब तक इस विकास का लाभ लगभग 7 लाख प्रभावित यात्रियों को नहीं मिलेगा।
14 ट्रेनों का स्टॉपेज बंद, यात्री परेशान
कोरोना महामारी के दौरान बंद किए गए ट्रेनों के स्टॉपेज आज तक बहाल नहीं हो पाए हैं। पांढुर्णा, सौंसर, प्रभात पट्टन और मुलताई विधानसभा क्षेत्र के लाखों लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। पांढुर्णा, दिल्ली-चेन्नई मेन लाइन पर मध्य प्रदेश का पहला बड़ा स्टेशन है, ऐसे में इसकी कनेक्टिविटी का अभाव क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा और धार्मिक यात्राओं को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
मांग: कोरोना-काल पूर्व की 14 ट्रेनें बहाल हों!
स्थानीय यात्रियों ने कोरोना काल से पहले नियमित रूप से रुकने वाली 14 महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज को तुरंत बहाल करने की मांग की है। इनमें स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस, संघमित्रा एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस, गंगा कावेरी एक्सप्रेस और दीक्षाभूमि एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इसके अलावा, केरल एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई ट्रेनों के ठहराव की मांग भी जोर पकड़ रही है।
पांढुर्णा-सौंसर रेल लाइन: 28 KM की मांग लंबित
स्टॉपेज की समस्या के साथ ही, पांढुर्णा-सौंसर के बीच 28 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की परियोजना भी वर्षों से लंबित है। दो बार सर्वेक्षण पूरा होने के बावजूद, स्थानीय नेताओं की निष्क्रियता के कारण इसे अब तक हरी झंडी नहीं मिल पाई है। यह लाइन स्वीकृत होने पर पांढुर्णा को जंक्शन का दर्जा मिल सकता है और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण शहरों से सीधा रेल संपर्क स्थापित हो सकता है।
स्थानीय नेतृत्व पर आक्रोश
स्थानीय भाजपा नेताओं की निष्क्रियता को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। जिले को बने 24 महीने हो चुके हैं और केंद्र में भी उन्हीं की सरकार होने के बावजूद, स्थानीय नेताओं द्वारा रेल मंत्रालय पर पर्याप्त दबाव न बनाने के कारण यह गंभीर समस्या जस की तस बनी हुई है।
सांसद विवेक बंटी साहू द्वारा रेल मंत्री को पत्राचार किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
जनता की चेतावनी: “यदि जल्द ही इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया और बंद पड़े स्टॉपेज बहाल नहीं किए गए, तो पांढुर्णा की जनता अपने उचित हक के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।