ग्राम देवखापा मे खुला माता रानी का प्राथमिक स्कुल भारत देश की अकल्पनीय सुंदर झांकी
प्राइड कदम संवाददाता निलेश कलसकर की रिपोर्ट
पांढुरना- पांढुरना के ग्राम देवखापा मे भारत वर्ष मे शायद पहली बार एक ऐसा संदेश ग्राम देवखापा के नवदुर्गा उत्सव मंडल व्दारा दिया गया है जिसमे मा भगवती प्राथमिक स्कूल खोलकर बच्चों को पढा रही है
प्राथमिक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है। इसका अर्थ है उनके बौद्धिक, शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को पोषित करना। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्कूल एक संतुलित पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं जिसमें शैक्षणिक विषय, शारीरिक शिक्षा और रचनात्मक कलाएँ शामिल हों।प्राथमिक शिक्षा विकास की आधारशिला है। प्राथमिक विद्यालय में ही बच्चे बुनियादी कौशल सीखते हैं जो उन्हें जीवन, कार्य और सक्रिय नागरिकता के लिए तैयार करते हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों और युवाओं को सशक्त बनाती है, उनके स्वास्थ्य और कल्याण की रक्षा करती है, और गरीबी के चक्र को तोड़ती है।
प्राथमिक विद्यालय का उद्देश्य:
बुनियादी कौशल का विकास: बच्चों को पढ़ना, लिखना और गणित जैसे आवश्यक कौशल सिखाना, जो भविष्य की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं.
ज्ञान का विस्तार: विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और भाषा कला जैसे विषयों के माध्यम से दुनिया के बारे में जानकारी देना.
सामाजिक और नैतिक विकास: बच्चों में साझा करने, निष्पक्षता, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को विकसित करना.
भविष्य के लिए तैयारी: बच्चों को आलोचनात्मक सोच और रचनात्मक कौशल विकसित करने में मदद करना, ताकि वे माध्यमिक शिक्षा के लिए तैयार हो सकें.
भारत में प्राथमिक शिक्षा:
भारत में प्राथमिक विद्यालय आमतौर पर कक्षा 1 से 5 तक के होते हैं.
यह शिक्षा बच्चों के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों के दौरान उन्हें आकार देने में मदद करती है.
मा भगवती के प्राथमिक स्कूल की झाकी बनाने का श्रय नवदुर्गा उत्सव मंडल देवखापा और उन तमाम युवा साथियों को जाता है जिन्होंने झांकी के माध्यम से शिक्षा ही सर्वोत्तम का संदेश दिया है