इस नवरात्रि का बड़ा रहस्य, मां दुर्गा क्यों आयेंगी हाथी पर होकर सवार,10 दिन का होगा उत्सव

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रिपोर्ट( राकेश शर्मा )मां दुर्गा की पूजा एवं साधना का उत्सव शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है। 1 अक्टूबर 2025 को दुर्गा उत्सव का समापन होगा। इस बार यह पर्व 9 दिन का नहीं बल्कि 10 दिन का होगा। 10 दिन की यह नवरात्रि 9 साल बाद मनाई जा रही है। इससे पहले सन 2016 में नवरात्रि 10 दिनों की थी।

इस नवरात्रि में तिथियों की घट-बढ़ की वजह से देवी पूजा के लिए भक्तों को एक अतिरिक्त दिन मिलेगा और भक्त 10 दिनों तक नवरात्रि मना पाएंगे। नवरात्रि की समाप्ति के बाद इस बार दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा। भारतीय पंचांग की गणना के हिसाब से इस नवरात्रि में चतुर्थी तिथि ही 2 दिन रहेगी यानी देवी कुष्मांडा की पूजा दो दिन की जाएगी।

नवरात्रि की शुरुआत में माँ दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व रहता है। ये वाहन नवरात्रि के प्रारंभ होने वाले दिन (वार) पर निर्भर करता है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है। जब नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होती है, तो माँ दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। हाथी को सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। ऐसे में हाथी पर सवार होकर माँ दुर्गा के आने से देश और समाज के सुख-समृद्धि और उन्नति के योग बनेंगे।

ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा -शारदीय नवरात्रि में रोज सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में सबसे पहले गणेश पूजा करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। फूल, चावल, दूर्वा, भोग गणेश जी को अर्पित करें। गणेश जी की पूजा के बाद देवी दुर्गा की मूर्ति में माता दुर्गा का आवाह्न करें। माता दुर्गा को आसन दें।अब माता दुर्गा को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से स्नान कराएं। दुर्गा जी को लाल वस्त्र, लाल चुनरी अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण, हार चढ़ाएं। इत्र अर्पित करें। कुमकुम से तिलक लगाएं। धूप और दीप जलाएं। लाल फूल अर्पित करें। चावल चढ़ाएं। नारियल अर्पित करें। मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। माता दुर्गा की पूजा में दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करें। पूजा में हुई गलतियों की क्षमा मांगे।

इन मंत्रों का करें जप – सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्येत्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तु ते॥ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

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