राधाष्टमी महोत्सव पर जमकर झूमे भक्त, इस्कॉन मंडला ने किया आयोजन, कैबिनेट मंत्री ने किया दिव्य अभिषेक
राधाष्टमी महोत्सव पर जमकर झूमे भक्त, इस्कॉन मंडला ने किया आयोजन, कैबिनेट मंत्री ने किया दिव्य अभिषेक

(रिपोर्ट–भगवती प्रसाद दुबे, जिला ब्यूरो–मंडला)
ग्राम टिकरवारा में इस्कॉन मंडला के द्वारा श्री श्री राधाष्टमी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिव्य अभिषेक, आरती एवं महाप्रसाद वितरण किया गया। पूरा वातावरण हरे कृष्ण – हरे कृष्ण के संकीर्तन से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री हरिनाम संकीर्तन से हुआ। संकीर्तन की मधुर ध्वनियों में भक्त झूम उठे। इसके पश्चात श्री श्री राधारानी का दिव्य अभिषेक सम्पन्न हुआ। अभिषेक के दौरान कैबिनेट मंत्री श्रीमति सम्पतिया उईके ने परिजनों के साथ पुष्प, दूध, दही, शहद व पवित्र जल से राधारानी का अभिषेक किया और महाआरती एवं 56 भोग महाप्रसाद वितरण किया। जिसमें हजारों श्रृद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विशेष रूप से श्री श्रीमद् भक्तिप्रेम स्वामी जी महाराज चेयरमैन, इस्कॉन मंदिर उज्जैन एवं दीक्षा गुरु का आगमन हुआ था स्वामी जी ने भक्तों को राधा-कृष्ण की महिमा पर प्रवचन देते हुए जीवन में भक्ति, सेवा व नाम-संकीर्तन के महत्व को समझाया। कार्यक्रम की प्रमुख आयोजक श्रीमती सम्पतिया उइके विधायक एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री, मध्यप्रदेश शासन रहीं। उन्होंने कहा कि राधाष्टमी जैसे दिव्य अवसर पर ग्राम स्तर पर ऐसे आयोजन होने से नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उनके गृहग्राम में इस्कॉन मंडला का यह पहला कार्यक्रम का मेरे जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वामी जी का आगमन और भव्य दिव्य दर्शन पूजन पाठ से पूरा परिवार हर्षित है। इस दौरान स्वामी जी ने कैबिनेट मंत्री को भागवत गीता भेंट की वहीं कैबिनेट मंत्री ने स्वामी जी का शॉल श्रीफल से सम्मान किया। वहीं स्वामी जी ने कहा कि पुरुष मनुष्य, आत्मा, सार्वभौमिक आत्मा, कृष्ण की संगति में उन्हें गोलोक में निवास करने के लिए कहा जाता है जो गायों और गोपी ग्वालों की दुनिया है राधा को सर्वोच्च देवी के रूप में दर्शाया गया है जबकि कृष्ण विनम्रतापूर्वक उनके सामने खड़े हैं। कृष्णवाद के अनुसार राधा मुख्य देवी हैं और कृष्ण की माया भौतिक ऊर्जा और प्रकृति स्त्री ऊर्जा से जुड़ी हैं। उच्चतम स्तर गोलोक में राधा को कृष्ण के साथ एकाकार और उसी शरीर में उनके साथ रहने वाला कहा जाता है। राधा कृष्ण के बीच का संबंध पदार्थ और गुण का है वे दूध और उसकी सफेदी या पृथ्वी और उसकी गंध की तरह अविभाज्य हैं। राधा की पहचान का यह स्तर उनकी प्रकृति के रूप में उनकी भौतिक प्रकृति से परे है और शुद्ध चेतना के रूप में मौजूद है राधा को कृष्ण के प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। कृष्ण के पास तीन शक्तियां हैं आंतरिक जो बुद्धि है बाहरी जो दिखावे उत्पन्न करती है और विभेदित जो व्यक्तिगत आत्मा का निर्माण करती है। उनकी मुख्य शक्ति वह है जो हृदय का विस्तार या आनंद उत्पन्न करती है। यह प्रेम की शक्ति प्रतीत होती है। जब यह प्रेम भक्त के हृदय में बस जाता है। तो यह महाभाव या सर्वोत्तम भावना का निर्माण करता है। जब प्रेम उच्चतम स्तर पर पहुँच जाता है तो वह स्वयं राधा में बदल जाता है। जो सबसे प्यारी और सभी गुणों से भरपूर है। इस दौरान उपस्थित भक्तों का भी कैबिनेट मंंत्री के द्वारा स्वागत किया गया।