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संजय टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत पर उठा सवाल – किसानों और संगठनों ने किया बड़ा खुलासा

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सीधी। संजय टाइगर रिजर्व के दुबरी परिक्षेत्र अंतर्गत खरवर बीट में एक और बाघ की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। लगातार हो रही बाघों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

स्थानीय लोगों और किसानों ने बताया कि अधिकारियों द्वारा हर बार मौत का कारण बदलकर पेश किया जाता है। कभी बिजली करंट से मौत होना बताया जाता है, तो कभी ट्रेन से कटने की बात कही जाती है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अलग हो सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर बाघ की लाश मिली है, वहां कोई खेती-किसानी नहीं होती। खेत गांव से लगभग 1 से 2 किलोमीटर दूर हैं। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा अपने बचाव के लिए किसानों को मोहरा बनाकर पेश किया जा रहा है।

 

किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला महज लापरवाही नहीं बल्कि संगठित शिकार और अवैध धंधे से जुड़ा हो सकता है। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे आखिर किस काम के हैं? अगर सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त है तो शिकारियों की गतिविधियां कैसे हो रही हैं? यह सवाल अब स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

 

भारतीय मजदूर संघ के जिला उपाध्यक्ष विकाश नारायण तिवारी ने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व में हो रही बाघों की मौतों के पीछे गहरी साजिश और भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा – “सरकार को इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इस तरह की घटनाएं संभव ही नहीं हैं। जंगली जानवरों को मौत के घाट उतारकर मोटी रकम कमाने का खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसे अब रोकना बेहद जरूरी है।”

 

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि पारदर्शी जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में लोग आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक की जाए और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए।

 

संजय टाइगर रिजर्व, जो कभी बाघों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता था, आज मौत का अड्डा क्यों बनता जा रहा है? यह बड़ा सवाल अब प्रदेश सरकार और वन विभाग के सामने है।

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