विद्यालय जाने का रास्ता बंद! — चोरगड़ी स्कूल के बच्चों को आवागमन में भारी परेशानी, प्रशासन बेखबर

सीधी से विनय त्रिपाठी की रिपोर्ट,
सीधी जिले के रामपुर नैकिन विकासखंड अंतर्गत चोरगड़ी विद्यालय से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां विद्यालय तक जाने वाली मुख्य सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यालय के प्राचार्य ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपा है। वहीं ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को पत्र लिखा है। बावजूद इसके, कई दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है, अभी थोड़ी ही बारिश हुई है और हालात इतने खराब हो गए हैं। यदि बारिश तेज़ हो गई, तो बच्चों का स्कूल पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि रास्ता कीचड़, पानी और रुकावटों से भरा हुआ है।
प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के लिए न केवल समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित की गईं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी आवाज़ उठाई गई। इसके बावजूद अब तक कोई कार्यवाही न होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या कोई राजनीतिक या स्थानीय दबाव प्रशासन की निष्क्रियता के पीछे है?
: प्रशासन की चुप्पी या लापरवाही? — बच्चों की पढ़ाई पर मंडरा रहा संकट
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का आरोप है कि यह केवल प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि कहीं न कहीं दबाव की राजनीति भी इसमें शामिल है। गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा सड़क को जानबूझकर अवरुद्ध किया गया है, जिसकी शिकायत विद्यालय प्रबंधन और ग्राम पंचायत दोनों ने उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई है। फिर भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा को लेकर सरकारें बड़े-बड़े वादे तो करती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता ही बंद हो गया, तो सरकार की योजनाएं और घोषणाएं कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगी।
कुछ अभिभावकों ने आशंका जताई कि अगर यह स्थिति बनी रही तो उन्हें मजबूरन अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद करना पड़ेगा। इससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा और वे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो जाएंगे।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे या यह मुद्दा भी कागजों और फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
जनता अब प्रशासन की जवाबदेही चाहती है — क्योंकि यह सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य का सवाल है।