दहेज प्रथा: एक ओर कंगाली, दूसरी ओर खुशहाली!

दहेज प्रथा आज भी समाज की जड़ में बसी एक ऐसी कुप्रथा है, जो एक माँ-बाप को कंगाल बना देती है तो दूसरी ओर किसी और के घर में खुशहाली ले आती है।
शादियों में लड़की पक्ष के माता-पिता को अपनी जीवनभर की कमाई और अक्सर अचल संपत्तियाँ जैसे ज़मीन-जायदाद तक बेचनी पड़ती हैं, ताकि बेटी की शादी दहेज सहित संपन्न हो सके। इससे उनका आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, और वे कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।
वहीं, लड़के वाले समाज में अपनी ऊँची मांगों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें दहेज के रूप में नकद, गाड़ी, गहने और कई बार फ्लैट या दुकान तक मिल जाते हैं, जिससे उनके घर में अचानक आर्थिक समृद्धि आ जाती है।
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