सीधी की सड़कें बनीं मौत का रास्ता,प्रशासन की बेरुखी से बेलगाम वाहन बन रहे जानलेवा

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सीधी से विशेष रिपोर्ट-शाहिद खान,

सीधी, मध्यप्रदेश-अपार बोझ ढोने वाली सड़कें, जहां एक ओर दैनिक जीवन की रफ्तार का प्रतीक हैं वहीं दूसरी ओर गैर जिम्मेदाराना चाल की वजह से अब मौत की पगडंडियाँ बनती जा रही हैं। आकस्मिक दुर्घटनाएं किसी न किसी के घर का चिराग रोज बुझा रही हैं। और हम सबके लिए छोंड़ जा रही है चीखते, चिल्लाते कई अनसुलझे ज्वलंत सवाल।

नाबालिग ड्राइवर और नशे में वाहन चालक – दो बड़े कातिल,

जिले में बीते कुछ महीनों में दर्जनों हादसे हुए हैं, जिनमें बहुत सारे निर्दोष लोगों को मौत ने अपना निवाला बना लिया। नि:संदेह इन दुर्घटनाओं के पीछे जो बेहद गंभीर कारण हैं उनमें नाबालिगों के हाथों में वाहनों के स्टेरिंग होना, जिसके लिए बराबर के अपराधी है उनके माता-पिता जिनके बच्चों पर उनका स्वयं का नियंत्रण नहीं। तथा शराब के नशे में ड्राइवरों द्वारा घोर लापरवाही पूर्वक वाहन चलाना। क्योंकि नशे के हालात में शरीर का कोई भी अंग सही तरीके से संचालित नहीं होता।नतीजतन सड़कों पर बेलगाम रफ्तार हर रोज किसी ना किसी परिवार की खुशियाँ सड़क पर बिखेरते हुए छू हो जाती हैं।

आकस्मिक दुर्घटनाओं के बाद प्रशासन हो या ट्रैफिक पुलिस कुछ समय के लिए जगते जरूर हैं लेकिन फिर अपने पुराने ढर्रे पर लौटते हुए न जाने कौन सी निद्रा में लीन हो जाते हैं। औपचारिक खानापूर्ति हेतु चालानी कार्रवाई नजर तो आती है लेकिन ट्रैफिक नियमों का पालन करवाने में दूर-दूर तक कहीं कोई सख़्ती दिखाई ही नहीं पड़ती। प्रशासन की यह बेरुखी देखकर तो यही लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतज़ार में स्वयं गिद्ध दृष्टि लगाए रहता है। 

समाधान ज़रूरी है ,वरना हालात और भयाबह होंगे।समाज और प्रशासन दोनों को अब जागरूक तथा जिम्मेदार तो होना ही होगा साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी इस मामले पर गंभीरता से विचार करते हुए इस ओर सभी अवश्यंभावी कदम उठाने होंगे। शैक्षणिक संस्थानों में ट्रैफिक एजुकेशन को अनिवार्य करना तथा

हर थाने को सप्ताह में एक दिन विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाना अच्छा विकल्प हो सकता है। और अगर शीघ्रता के साथ प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सीधी कि सड़कों पर रोज़ कोई न कोई ज़िंदगी यूं ही कुचली जाती रहेगी और सड़कें खून से नहाती रहेगी।

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