बसंत पंचमी पर सोन नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने किया अमृत स्नान


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मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मन को शांति मिलती है | विशेषकर बसंत पंचमी के दिन स्नान करने का महत्व और अधिक है। क्योंकि यह दिन ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस सुभ दिन को लेकर आज सिहावल सोन नदी घाट, नकझर- सिहावल रामपुर घाट तथा जोगदह पुल घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई है |
हिन्दू धर्म में ऋतुओं के आधार पर भी त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक बसंत पंचमी पर्व भी है। शास्त्रों में बताया गया है कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से बसंत ऋतू का शुभारंभ हो जाता है। इस विशेष दिन पर देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग प्रकार से इस पर्व को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष बसंत पंचमी तीन फरवरी को मनायी जा रही है | आज सोमवार के दिन विद्या की आराध्य देवी मां सरस्वती जी की अनेक शैक्षिक संस्थानों में पूजा अर्चना विधि विधान पूर्वक हो रही है | मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं | शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है | आज माघ माष के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है | हिंदू धर्म के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से वाणी, कला और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का विधान है। साथ ही इस पर्व के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं, जिन्हें जानना आवश्यक है।
बसंत पंचमी से जुड़ा वैदिक महत्व
धार्मिक वेद एवं पुराणों में बसंत पंचमी पर्व के महत्व के विषय में विस्तार से बताया है। बता दें कि भारत में छह मुख्य ऋतू हैं, जिनमें से बसंत ऋतू को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन ही भगवान ब्रह्मा जी के जिह्वा से वाणी, ज्ञान और बुद्धि की देवी माता सरस्वती प्रकट हुई थीं। यही कारण है कि इस दिन माता सरस्वती की विशेष पूजा का विधान है। साथ ही मान्यता यह भी है कि इस विशेष दिन पर शिक्षा या संगीत से संबंधित चीजों की पूजा करने से भी व्यक्ति को लाभ मिलता है और उसे इन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही इस दिन से पृथ्वी पर नवीनता का पुनः सृजन होता है। पेड़-पौधों में नए और सुन्दर पुष्प आने शुरू हो जाते हैं।
बसंत पंचमी से ठंड की अनुभूति कम होने लगती है और मौसम में संतुलन बना रहता है। इसके साथ बसंत पंचमी पर्व के दिन पीले रंग का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है। हिन्दू धर्म में इस रंग का महत्व बहुत अधिक है, किन्तु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस रंग को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस रंग को डिप्रेशन दूर करने में सबसे कारगर माना जाता है। साथ यह दिमाग को पूर्णतः सक्रिय रखने में मददगार साबित होता है। इस रंग से आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती के विवाह पूर्ण होने के बाद तिलक समारोह हुआ था और शादी की रस्मों की भी शुरुआत हुई थी इसलिए प्राणी जगत में आज के ही दिन से बसंत पंचमी पर शादी के सबसे ज्यादा मुहूर्त होते है और लोग मांगलिक कार्यों की शुरुआत करते हैं।