मजेदार बातें.. जाग रुक मतदाता या जाग रुकमत दाता
यह एक मजेदार बात है कि कुछ लोग सिर्फ मजा लेने के लिए बातें करते हैं । कुछ लोग जमाने में अपनी धाक जमाने के लिए बड़ी – बड़ी बातें करते हैं। वहीं कुछ लोग तो अपने मन की बात भी नहीं कह पाते हैं। कुल मिलाकर देखा जाय तो बातें करना एक बहुत बड़ी कला है। हमारे संविधान में भी सबको अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है। बोलने की स्वतंत्रता दी है।
बात करने की इस कला में कुछ संगी साथी बहुत माहिर होते हैं। इतने माहिर कि वो बाल का खाल निकाल देते हैं। जिसमें दो साथी बहुत फेमस हो गए । उनकी दक्षता को देखकर दोस्तों ने उनका नाम बातूनी और बातरोगी रख दिया। संकोची स्वभाव के साथी उन्हें दूर से देखकर रास्ता बदल लेते हैं।
लेकिन कभी – कभी ये दोनों दोस्त समुद्र मंथन की तरह बातों को मथकर अच्छी बातें भी निकाल लेते हैं। आज दोनों साथी के मध्य मंथन के लिए जो टापिक आया है वह बहुत मजेदार है। बहुत रोचक है। उस टापिक का नाम है – जागरुक मतदाता । जागरुक मतदाता की भूमिका देश की प्रगति में कैसी है ?
आइये देखते हैं जागरुक मतदाता टापिक पर दोनों का विचार मंथन किस प्रकार होता है ? कैसे तर्क देते हैं ? क्या नया कलेवर निकल कर आता है । इसमें पहला सवाल बातरोगी ने बातूनी से इन शब्दों में दागा –
सवाल – हर चुनाव में जागरुक मतदाता अभियान क्यों चलाया जाता है ? क्या आजादी के बाद भी मतदाता जागरुक नहीं हुए आखिर इसका कारण क्या है और निवारण क्या है
बातूनी जी बातरोगी के इस राष्ट्रीय सवाल का जवाब आज पहले की तरह खटाखट नहीं दे पाए । क्योंकि यह बहुत गंभीर सवाल था। इसलिए वे चिंता सागर में डूब गए । तब उनके दोस्त बातरोगी ने मन में सोचा आज इसकी हेकड़ी निकल गई। अपने आप को बहुत तीस मारखाँ समझता था। आज आया ऊँट पहाड़ के नीचे।
तभी अचानक बातूनी का सर्किट माइंड एक्टिव हुआ। उसने कहा देखो भाई, देश की जनता को जिस प्रकार जागरुक मतदाता होने का पाठ पढा़या गया। जनता भी उसी प्रकार पाठ पढ़कर जागरुक मतदाता बन गई है । इसमें कोई शंका नहीं है।
फिर बातूनी ने अपने ज्ञान का पिटारा ओपन करते हुए आगे कहा भाई साहब ! मैंने पढा़ था कि शब्दों में असीम शक्ति होती है। और शब्द शक्ति का प्रभाव जबरदस्त होता है। हकीकत में हमारे देश में शब्द शक्ति का ही जादू चल रहा है ।
बातरोगी को बातूनी का यह रहस्यात्मक बात बिल्कुल समझ में नहीं आया। तब मुँह मटका कर बोला – जनाब मुझे गोल मोल जवाब नहीं , साफ सुथरा जवाब चाहिए। उस जवाब को मेरी तरह सब लोग आसानी से समझ सकें। क्योंकि यह राष्ट्रीय मुद्दा है। मजाक नहीं।
इस पर बातूनी ने गर्व से कहा, भाई साहब ! आपके सवाल का जवाब तो जागरुक मतदाता शब्द में ही छिपा है। जिस प्रकार दूध में मलाई छिपा रहता है। लेकिन सच्चाई यह है कि शायद जागरुक मतदाता शब्द के ताना बाना को, शब्द के मायाजाल को हम ठीक से समझ ही नहीं पाए।
इसी बीच बातरोगी बातूनी की बात काटते हुए कहा हम समझ ही नहीं पाए हैं, इसीलिए तो आप जैसे समझदारों से समझना चाहते हैं। अब हमें एक एक शब्द क्लीयर कट समझाईएगा ।
अब बातूनी ने जागरुक शब्द का आपरेशन किया। जाग + रुक जागरुक। उन्होंने इसका भावार्थ बताते हुए कहा – तू जाग, लेकिन रुक। आगे मत बढ़। जनता भी आजादी से लेकर अब तक इसी आदेश का पालन जाने अनजाने कर रही है। इसमें दोषी कौन जागने को कहा जाग गए। रुकने को कहा रुक गए।
बातूनी ने बात आगे बढा़ते हुए कहा भाई साहब! यही है शब्द शक्ति का प्रभाव। इसी शब्द शक्ति के कारण ही भारत में महाभारत हुआ था।
बातरोगी की जिज्ञासा जाग उठी। उसने बातूनी को टोंकते हुए कहा भाई साहब ! महाभारत की लड़ाई तो अस्त्र शस्त्र की शक्ति से हुई थी । इसमें शब्द शक्ति कहाँ से आई ?
इस बार बातूनी ने मुस्कुरा कर जवाब दिया। भाई साहब ! जब दुर्योधन का सिर दीवाल से टकराया तब द्रौपदी ने कहा – ‘ अंधे के बेटे अंधे होते हैं। ‘ देखने में यह केवल शब्द लगता है। लेकिन इस शब्द शक्ति ने दुर्योधन के मन में प्रतिशोध की ज्वाला जगा दी। परिणाम स्वरुप भारत ने महाभारत देखा।
बातरोगी ने बातूनी के शब्द शक्ति की प्रभावशीलता को जानकर ताली बजाया और कहा – वाह उस्ताद ! आपने आज अपनी बात का लोहा मनवा लिया। आपका जवाब भी लाजवाब लगा। बहुत बहुत धन्यवाद। अंततः बताइए कि अब जागरुक मतदाता के लिए देश को कौन सा सिद्धांत अपनाना चाहिए ?
जवाब देते हुए बातूनी ने कहा – मेरे हिसाब से देश को जागरुक मतदाता अभियान के लिए स्वामी विवेकानंद के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।
बातरोगी ने पूछा स्वामी विवेकानंद ने क्या कहा है ? उनका सिद्धांत क्या है ?
तब बातूनी ने स्वामी विवेकानंद के कथन को कोट करते हुए कहा – ‘ उठो जागो और तब तक रुको मत जब तक तुम्हें लक्ष्य न मिल जाए। ‘ यह नव भारत निर्माण का महावाक्य था। जिसने पूरे विश्व में भारत का डंका बजाया था।
बातूनी ने अपनी बात दुहराते हुए कहा कि हमें अब प्रचलित अभियान – जाग और रुक मतदाता के बदले – जाग और रुकमत दाता । यह अभियान चलाना होगा। इससे देश में नई विचार क्रांति आएगी । यही सहीं समय की माँग है।
यह बात बिलकुल सत्य है कि आज भारत को स्वामी विवेकानंद के उठो जागो और रुको मत के सिद्धांत को अपना कर आगे बढ़ना ही होगा। उन्नति के उन्नत शिखर पर चढ़ना होगा। तभी हम स्वामी विवेकानंद के सपनों के भारत को साकार कर सकते हैं।
डाॅ मुन्ना लाल देवदास
( राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कृत )
साहित्यकार व अंतर्राष्ट्रीय गीतकार
नगर पंचायत कोपरा, जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़, Ⓜ️ 9993644766