मझरेटी में कोरोना से भी खतरनाक बना अतिक्रमण का रोग

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मझरेटी में कोरोना से भी खतरनाक बना अतिक्रमण का रोग

*रिपोर्ट- नेशनल ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा*

 

*सीधी*- सीधी जिले की बहरी तहसील अंतर्गत जिला मुख्यालय सीधी से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी मझरेटी गाँव में आम जनता विभिन्न तरह के अतिक्रमणकारियों से त्रस्त एवं परेशान होते हुए खून के आंसू बहा रही है! मगर इन आंसुओं की परवाह करने वाला ना तो कोई स्थानीय नेता है , ना विधायक है, न एसडीम है, ना तहसीलदार है, ना आर आई है, ना पटवारी है! ग्रामीणों की छोटी बड़ी समस्याओं का निवारण भी शून्य हो गया है! क्षेत्रों से नए-नए जनप्रतिनिधि चुन करते आते तो हैं आम जनता को भारी भरकम वायदों का सपना दिखाते तो हैं लेकिन अल्प समय में ही जनता की समस्याओं के सरोकार से किनारा कर लेते हैं!

 

गांवों में बिजली पानी सड़क है तो सही, लेकिन इन सब पर या तो किसी सरहंग, दबंग या फिर कर्मचारियों का ही अतिक्रमण है! गांव की सड़कों में ऐसा अतिक्रमण हो चला है कि वाहनों को देखकर सड़के रोने लगती हैं, वाहन कांपने एवं थरथराने लगते हैं! किसी अज्ञात भय से वाहन चालकों के हाथ पैर अनियंत्रित हो जाते हैं! हर गांव में पटवारियों की तैनाती है लेकिन उनके द्वारा किसी भी अतिक्रमण की सूचना संबंधित विभाग एवं अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई जाती! और ना ही किन्ही अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण के संबंध में कोई भी रिपोर्ट मांगी जाती है! यह सभी, पीड़ित जनता के बराबर और भरपूर गुनहगार हैं! पीड़ित जनता द्वारा बार-बार शिकायत का भी किसी पर कोई असर ही होता दिखाई नहीं देता! ग्राम पंचायत क्षेत्र मझरेटी कोठार में सड़कों और गलियों का अतिक्रमण कोरोना से भी भयंकर हो चला है।अतिक्रमण की तस्वीर चीख चीख कर अपनी दुर्दशा को रोज सुनाती है।खबर का असर सरकार , सांसद, विधायक अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर होना अवश्यंभावी एवं लाजमी है! आम जनता की समस्याओं से सरोकार रखना ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। क्योंकि सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है!

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