डिंडोरी।मामला है जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत देवपुर का जहां के सरपंच सचिव के द्वारा प्राक्कलन को दर किनारा करते हुए छोटी सी नाला में 14 लाख रु :का स्टॉप डैम निर्माण कराया गया

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प्राईड इंडिया न्यूज़ जिला ब्यूरो चीफ मनोज कुमार यादव जिला डिंडोरी मध्य प्रदेश

जिम्मेदारों के द्वारा छोटी नाला में 14 लाख रू. स्टॉप डैम की तकनीकी स्वीकृति कर शासन को लगाया चूना….

जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत देवलपुर का मामला…

डिंडौरी, जिले में मनरेगा योजना ग्राम प्रधानों , सचिवों, ठेकेदारों और जनपद पंचायत में बैठे अधिकारियों की कमाई का जरिया बन चुकी है, जिसका जीता जागता उदाहरण जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत देवलपुर में छोटी अजान नाला में 14 लाख रू. की तकनीकी स्वीकृति कर लाखों रू. का बंदरबाट किया गया है।

ये रहा पूरा मामला….

दअरसल जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत देवलपुर में मनरेगा योजना से जिम्मेदारों के द्वारा छोटी सी अजान नाला में 14 लाख रू.का स्टॉपडैम निर्माण कराया गया है, जिसे देखकर लगता है कि सिर्फ अपने जेब भरने के लिये लाखों रू की लागत से स्टॉपडैम का निर्माण कराये है, क्योंकि जब नाला छोटी है, तो कम लागत से भी निर्माण कराया जा सकता था किंतु जिम्मेदारों के द्वारा 14 लाख रू खर्च कर दिया गया। बरहाल कहना गलत नहीं होगा कि नरेगा योजना अब विकास कार्यों के लिए नहीं बल्कि कमाई करने का जरिया बना गया है, जिसमें तकनीकी अमला से सांठगांठ कर खुलेआम शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।

छोटी नाला में 14 लाख रू का स्टॉप डैम क्यों…

बता दें कि देवलपुर के अजान नाला की चौड़ाई बहुत कम है,जहां बड़े स्टाॅपडैम बनाने की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन जिम्मेंदारों के द्वारा कमीशन के चक्कर में 14 लाख रू की लागत से स्टाॅपडैम का निर्माण करा दिया गया है। इससे आप साफ अंदाजा लगा सकते है कि जिम्मेदारों के द्वारा स्वयं को ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में मनमानी पूर्वक प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति कर स्टाॅप डैम का निर्माण कराया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण स्थल में पर्याप्त जगह नहीं होने के चलते किसान के उपजाऊ खेत को खोदकर जिम्मेदारों के द्वारा जगह बनाया गया है।

आधी लागत में हो सकती थी स्टॉपडैम का निर्माण…

बात दे कि देवलपुर के अजान नाला में 7 से 8 लाख रू. की लागत से स्टॉपडैम का निर्माण कराया जा सकता था,लेकिन कम जगह में 14 लाख रू.का स्टॉपडैम निर्माण को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि तकनीकी अधिकारियों के द्वारा बगैर देखे ही प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृति दे दी गई है। जबकि उक्त स्थान पर कम लागत की स्टाॅपडैम का निर्माण करा किसानों को लाभांवित किया जा सकता है, किंतु जिम्मेदारों के द्वारा मनमानी पूर्वक सरकारी पैसे का दुरूपयोग करते हुए मोटी रकम खर्च कर स्टाॅपडैम का निर्माण करा अपना जेब भर लिया गया है।

इनका कहना है,,

आपके माध्यम से जानकारी मिली है,मैं उपयंत्री को भेजकर दिखवाता हूं।

सीपी साकेत,सीईओ,जपं.समनापुर।

मेरे समय का टी.एस. कराया हुआ नहीं है,पहले का टी.एस. था,इसलिए स्टॉपडैम का निर्माण कराया गया है।

अरुण भगत्या,उपयंत्री जपं. समनापुर।

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