डाॅ मुन्नालाल देवदास की नई किताब कला संस्कृति के गढ़ – छत्तीसगढ़

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कला संस्कृति के गढ़ – छत्तीसगढ़, यह छत्तीसगढी़ काव्य संग्रह है। इसके संपादक राष्ट्रपति पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधान पाठक एवं साहित्यकार डाॅ मुन्ना लाल देवदास है। इस नई किताब में डाॅ देवदास ने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, शिक्षा साहित्य, परंपरा, तीज त्यौहार आदि की रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियों को संग्रहित किया है । जिससे हमारी आगामी पीढ़ी इससे लाभान्वित हो सके। और छत्तीसगढी़ कला संस्कृति समृद्ध होता रहे ।

डाॅ देवदास की यह नई किताब नवाचार पर आधारित है । इसमें छत्तीसगढ़ के मूर्धन्य साहित्यकारों के शोध आलेख है। तथा नवोदित रचनाकारों एवं विद्यार्थियों की छत्तीसगढी़ कविताओं को भी सम्मान दिया गया है। ताकि नई पीढ़ी भी अपनी छत्तीसगढी़ अस्मिता के साथ जुड़ सके और छत्तीसगढी़ लेखन कौशल आगे बढ़ सके।

आपको बताना चाहेंगे कि इसमें छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कहानीकार अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त डाॅ परदेशी राम वर्मा, राष्ट्रपति पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्राचार्य सीताराम साहू श्याम, जगदीश देशमुख, डाॅ पीसी लाल यादव, मीर अली मीर, राज्यपाल पुरस्कृत चोवाराम वर्मा बादल, सुशील भोले, दिलीप टिकरिहा, नरेन्द्र वर्मा, इस्माइल खान, भुवनेश्वर प्रसाद गोपाल, विरेन्द्र सिंह ठाकुर, कमलेश कौशिक, टीकम चंद सेन, चोपेश्वर साहू आदि के आलेख और कविता शामिल हैं। इसी प्रकार शासकीय उच्च्तर माध्यमिक विद्यालय करेली के 15 छात्र छात्राओं की छत्तीसगढी़ कविता भी शामिल है। जो हमारी कला संस्कृति पर आधारित है। डाॅ मुन्ना लाल देवदास की यह नई किताब गीता प्रकाशन हैदराबाद लखनऊ दिल्ली से प्रकाशित हो रही है। विशेष योगदान प्रकाशक एवं बुक सेलर नितीन टंडन का है।

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