महुआ गांव में कबाड़ की दुकान पर खप रहा चोरी का कीमती सामान

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प्राइड इंडिया न्यूज़ रीवा से
शिवेन्द्र सिंह की रिपोर्ट

सरई थाना अन्तर्गत महुआ गांव में कबाड़ का व्यवसाय लम्बे अर्से से चल रहा है।सूत्रों की मानें तो कबाड़ के आड़ में चोरी के कीमती सामान भी यहां खप रहे हैं।महुआ गांव में दो बड़े कबाड़ व्यवसायी हैं जो इस कारोबार में काफी लम्बे समय से जुड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि जिला मुख्यालय से तकरीबन सौ किलोमीटर से ज्यादा महुआ गांव स्थित कबाड़ की दुकान में बड़े स्तर पर कबाड़ का व्यवसाय चल रहा है।इसके अलावा गांव के कई लोग फुटकर कबाड़ व्यवसायी के रूप में भी काम कर रहे हैं जो गांव-गांव से पुराने लोहे और टिन टिप्पर इक्कठा करके लाते हैं।अक्सर कबाड़ की दुकानों में चोरी के कीमती सामान भी कबाड़ के भाव में दब जाते हैं।कबाड़ की दुकान में नंबर एक से लेकर नंबर दो तक सब कुछ कबाड़ के रूप में बिक रहा है। इस ओर न तो पुलिस की कार्यवाही दिखती है और न ही जिला प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है।यही वजह है कि गांव में चोरी के मामले भी बढ़ रहे हैं।

चोरों के लिए वरदान साबित हो रही कबाड़ दुकानें

चोरी का ज्यादातर माल आसानी से कबाड़ दुकानों में खपाया जाता है।गांवों में नियम के विपरीत तरीके से चल रहीं कबाड़ दुकानें विभिन्न अपराधों को पनपने का मौका दे रही है।वर्तमान में ये कबाड़ की दुकानें चोरों के लिए वरदान साबित हो रही है।चोरी का ज्यादातर सामान इन दुकानों में बेचा जाता है।कबाड़ की दुकानों की वजह से चोरी की घटनाएं भी बढ़ रही है।

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सूत्र बताते हैं कि लोग किसी भी सामान के लिए पहले कबाड़ दुकानों में संपर्क करते हैं।क्योंकि कबाड़ दूकान पर सेकेंड हैंड सामान कम कीमत पर मिल जाता है।यहां बेख़ौफ़ कबाड़ की दुकान संचालित हो रही है जहां चोरों की बल्ले बल्ले है।वहीं मौजूदा कबाड़ दुकानों में कम कीमत पर सामान मिलने की चर्चा भी जोरों से चल रही है।हालांकि एक कहावत जो सभी ने सुना होगा,संईया भये कोतवाल तो डर काहे का।आगे देखना दिलचस्प यह होगा कि क्या उक्त कबाड़ की दूकानों पर प्रशासनिक चाबुक चलेगा या यूं ही चोरी के माल कबाड़ की दुकान में खपते रहेंगे।

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