तेंदुए की खाल व पंजे रखने वाले आरोपी की जमानत आवेदन खारिज

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माननीय न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर के द्वारा आरोपी अशोक सिंह परस्ते को वन अपराध प्रकरण क्रं. 237/07 अंतर्गत वन्यजीव(संरक्षण) अधिनियम 1972 यथा संशोधित 2022 की धारा 9, 39, 44, 48ए, 49बी, 51, 52 एवं 57 में जमानत आवेदन पत्र निरस्त किया।

घटना संक्षेप में इस प्रकार है कि दिनांक 02.06.2023 को स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स म.प्र. भोपाल एवं टाइगर स्ट्राइक फोर्स जबलपुर के संयुक्त स्टाफ द्वारा मुखबिर की सूचना प्राप्त हुई कि दो मोटरसाइकिल पर चार लोग तेंदुए का शिकार कर खाल लेकर जाने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना के अनुसार डिण्डौरी से शहडोल मार्ग पर चंदनघाट के पास घेराबंदी की गई। इस दौरान चंदनघाट के तरफ से दो मोटरसाइकिल पर चार लोग मुखबिर द्वारा बताये गये हुलिए के अनुसार आते हुए दिखाई दिए । दल द्वारा उन्हे मोटरसाइकिल सडक किनारे लगाने का इशारा किया गया तो उनके द्वारा गाडी रूकवाने का कारण पूछा गया और बहस करने लगे। दल के सदस्यों द्वारा अपना परिचय देने पर उन्होने अपनी मोटरसाइकिल रोड के किनारे खडी कर दी गई। स्टाफ द्वारा पूछताछ करने पर उन्होने अपना नाम अश्‍वनी उर्फ आशीष मरावी, दुर्वेन्द्र सिंह मरावी, अशोक सिंह परस्ते एवं रूप सिंह उइके बताया गया। अश्‍वनी उर्फ आशीष जिसकी मोटरसाइकिल के पीछे बैठे व्यक्ति जिसका नाम रूपसिंह उईके के हाथ में जो लाल रंग का थैला जो बाजु से काले रंग का था। थैले को खोलकर दिखाने को कहा गया तो रूपसिंह ने थैले को खोलकर दिखाया जिसके अंदर वन्य प्राणी तेंदुए की एक नग खाल जिसमें छेद बने हुए थे यह छेद उस खाल को कीडो के द्वारा नुकसान पहुंचाने से बने थे। दूसरी मोटरसाइकिल पर बैठे अशोक सिंह परस्ते से पूछताछ की गई और उसकी तलाशी लेने पर उसके पैंट के दाएं जेब में वन्यप्राणी तेंदुए का एक नग कटा हुआ तथा पूरी तरह से सूखा हुआ तथा कीडो द्वारा नुकसान पहुंचाया गया पंजा जिस पर बाल थे उसमें चार नग नाखुन लगे पाये गये। इसके बाद देवेन्द्र सिंह की तलाशी लेने पर उसकी पेंट के जेब से वन्य प्राणी तेंदुए का एक नग कटा हुआ तथा पूरी तरह से सूखा हुआ तथा कीडो द्वारा नुकसान पहुंचाया गया पंजा जिसमें दो नग नाखुन वन अधिकारियों के द्वारा जब्त कर आरोपीगण को अग्रिम कार्यवाही हेतु वन विश्राम गृह डिण्डोरी लेकर गये। उक्त प्रकरण में आरोपी अशोक सिंह परस्ते का जमानत आवेदन पत्र माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर के यहा प्रस्तुत किया गया। उप-संचालक(अभियोजन) श्री विजय कुमार उईके व जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री अजय कुमार जैन के मार्गदर्शन में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती बविता कुल्हारा द्वारा उक्त मामले में जमानत आवेदन पत्र का विरोध किया गया।
श्रीमती बविता कुल्हारा सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी द्वारा तर्क दिए कि चुंकि सरकार भी तेंदुए, शेर की सुरक्षा हेतु इतनी कडी व्यवस्था कर रही है, सरकार द्वारा विदेशो से तेंदुए व चीता भारत लाये गये है जिससे जंगल व जंगल से प्राप्त मूल्यवान औषधि व जंगली सम्पति का संरक्षण हो सके। यदि अपने देश के व्यक्ति ही ऐसे मूल्यवान पशु शेर, तेंदुए का वध करेगे तो यह देश, समाज व पर्यावरण के लिए हानिकारक है। अभियोजन अधिकारी के तर्को से सहमत होते हुये न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जबलपुर के द्वारा आरोपी अशोक सिंह परस्ते को वन अपराध प्रकरण क्रं. 237/07 अंतर्गत वन्यजीव(संरक्षण) अधिनियम 1972 यथा संशोधित 2022 की धारा 9, 39, 44, 48ए, 49बी, 51, 52 एवं 57 में जमानत आवेदन पत्र निरस्त किया गया।

भगवत उईके
मीडिया सेल प्रभारी/
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी
जिला-जबलपुर

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