छतरपुर में जानलेवा ठंड और घना कोहरा, अलाव की व्यवस्था पूरी तरह फेल
लक्ष्मण कॉलोनी में हालात बदतर, नगर पालिका की लापरवाही उजागर
छतरपुर।
जिले में इन दिनों घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सुबह से लेकर देर रात तक छतरपुर शीतलहर की चपेट में है। तापमान लगातार गिर रहा है, वहीं घने कोहरे के कारण दृश्यता भी बेहद कम हो गई है। ऐसे हालात में नगर पालिका द्वारा की जाने वाली शीतकालीन राहत व्यवस्थाएं पूरी तरह धराशायी नजर आ रही हैं।
शहर की लक्ष्मण कॉलोनी में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। यहां न तो सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाए जा रहे हैं और न ही ठंड से बचाव के लिए किसी प्रकार की लकड़ी या अन्य साधन उपलब्ध कराए गए हैं। मजबूर होकर स्थानीय नागरिक ₹10 प्रति किलो के हिसाब से लकड़ी खरीदकर अलाव जलाने को विवश हैं, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए भारी आर्थिक बोझ बन गया है।
गरीब, बुजुर्ग और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
लक्ष्मण कॉलोनी में बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग, बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे रहते हैं। रात के समय ठंड इतनी तीव्र हो जाती है कि लोग खुले में बैठना तो दूर, घरों के अंदर भी ठिठुरने को मजबूर हैं। कई परिवारों ने बताया कि ठंड के कारण बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ रही है, सर्दी-खांसी, बुखार और सांस की समस्याएं बढ़ने लगी हैं।
नगर पालिका पर गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल ठंड के मौसम में अलाव की घोषणा तो की जाती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर व्यवस्थाएं न के बराबर रहती हैं। नागरिकों ने कई बार नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोहरे से बढ़ा हादसों का खतरा
घने कोहरे के कारण सुबह और रात के समय सड़क पर चलना भी जोखिम भरा हो गया है। दृश्यता बेहद कम होने से दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। ठंड और कोहरे के इस दौर में यदि नगर पालिका द्वारा तुरंत राहत कार्य शुरू नहीं किए गए, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
नागरिकों की मांग
लक्ष्मण कॉलोनी सहित पूरे छतरपुर शहर के नागरिकों ने मांग की है कि नगर पालिका तत्काल सार्वजनिक स्थानों, कॉलोनियों और चौराहों पर अलाव की व्यवस्था करे, लकड़ी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे और ठंड से बचाव के लिए अन्य आवश्यक कदम उठाए।
अब देखना यह है कि नगर पालिका कब नींद से जागती है और कब ठंड से जूझ रहे नागरिकों को राहत मिलती है।