सिंगरौली : आंदोलन के ऐलान पर सन्नाटा, सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाते लोग

सिंगरौली की राजनीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
भास्कर मिश्रा की गिरफ्तारी और अब तक रिहाई न होने पर कुछ तथाकथित लोग खुशी ज़ाहिर कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाते हुए ये लोग यह भूल जाते हैं कि भास्कर मिश्रा अपने लिए या अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि सर्व समाज के हित में लड़ रहे थे।
उन्होंने जिन मुद्दों पर संघर्ष किया—
बेरोज़गारी का ज्वलंत सवाल
कोयला परिवहन से बढ़ता प्रदूषण
लगातार हो रहे सड़क हादसे
हर स्तर पर फैलता भ्रष्टाचार
इन्हीं मुद्दों को लेकर उन्होंने आवाज़ बुलंद की थी।
लेकिन अफ़सोस की बात है कि कुछ चाटुकार, कुछ निष्क्रिय और कुछ अवसरवादी लोग सिर्फ़ फेसबुक पर बयानबाज़ी कर रहे हैं।
असल मुद्दों पर न तो ज़मीन पर उतरते हैं और न ही जनता के लिए कोई संघर्ष करते हैं।
पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने भी एसपी कार्यालय में ज्ञापन देते वक्त स्पष्ट ऐलान किया था कि यदि भास्कर मिश्रा की रिहाई 3 दिन के भीतर नहीं हुई तो पूरे संभाग ही नहीं, पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा।
लेकिन आज तक आंदोलन का नामोनिशान नहीं दिख रहा है।
अब जनता पूछ रही है—
क्या सिंगरौली के सभी ज्वलंत मुद्दों का बोझ अकेले भास्कर मिश्रा पर डाल दिया गया है?
क्या यह जिम्मेदारी केवल एक ही व्यक्ति की थी?
अगर राजनीति सिर्फ़ आज इधर, कल उधर के खेल तक सीमित रह जाएगी,
तो जनता के साथ धोखा और समस्याओं का अंबार और बढ़ेगा।
सिंगरौली की जनता को गुमराह करने का सिलसिला बंद होना चाहिए।
जो वास्तव में दमदार हैं, उन्हें खुले मंच से आगे आकर संघर्ष करना चाहिए।
लेकिन सच्चाई यही है कि आज कोई लाल सामने नहीं आ रहा,
सिर्फ़ पीठ पीछे वार करने और दिखावे की नेतागिरी करने वाले लोग ही सक्रिय हैं। सिंगरौली से सुनील पांडे की रिपोर्ट