मप्र सीएम हेल्पलाइन में ब्लैकमेलर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ मुहिम
संवाददाता- निलेश कलसकर पांढुरना
“ब्लैकमेलर” शब्द रोचक है। 16वीं-17वीं शताब्दी में स्कॉटलैंड से आया। मेल का मतलब रेंट या पेमेंट होता था। बाद में यह प्रोटेक्शन मनी बना। स्कॉटिश किसान और ज़मींदार पड़ोसी लुटेरों या कबीलाई गिरोहों को पैसे देते थे ताकि वे उनकी फ़सलें और मवेशी न लूटें। बाद में इसका मतलब जबरन वसूली या धमकी देकर पैसा/फ़ायदा लेना हुआ।
मप्र CM हेल्पलाइन में ब्लैकमेलर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। प्रशासनिक अधिकारियों की ब्लैकमेलिंग रुकनी भी चाहिए। BNS के तहत ब्लैकमेलिंग अपराध भी है। पर मेरे कुछ छोटे सवाल है:
1️⃣ ब्लैकमेल होते किस किस्म के ईमानदार अधिकारी हैं?
2️⃣ वह कौन सी शिकायतें हैं जिससे अधिकारी ब्लैकमेल हो रहे हैं?
3️⃣ उन शिकायतों की जानकारी पब्लिक प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं आती?
4️⃣ ब्लैकमेल हो रहा ईमानदार अधिकारी BNS की धारा के तहत शिकायतकर्ता के विरुद्ध FIR क्यों नहीं कभी दर्ज़ कराता?
5️⃣ “ईमानदारी से किए जिस काम” को लेकर ब्लैकमेल किया जाता है उस काम की जाँच शासन क्यूँ नहीं करता?