पांढुर्णा प्रशासन की मेहरबानी से भू-माफियाओं के वारे नारे पांढुर्णा में अवैध कॉलोनियो पर कब होगी ठोस कार्यवाही, 23 महीने का हुआ वनांचल समाचार जिला ब्यूरो चिफ-निलेश कलसकर पांढुरना- पांढुरना भाजपा के राज में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद । पांढुर्णा नगर में इन दिनों धड़ल्ले से पनप रही अवैध कालोनियों पर प्रशासन ने मौन साधा है जबकि पांढर्णा जिला अस्तित्व में आने के लिए 22 महीने का समय बीत चुका है लेकिन प्रशासन के सुस्त रवैये पर अब सवाल खड़े होने लगे है। कृषि भूमि को अवैध कॉलोनी कटने से रोकने के लिए काटने वाले और कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर करने का प्रावधान है। इसके बावजूद पांढुर्णा नगर में बैठे जिले के मुख्य अधिकारी अवैध कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ सख्ती कार्यवाही करने की जगह पर खानापूर्ति कर रहे हैं। अवैध कॉलोनाइजर पर इतना क्यो मेहरबान बना है पांढर्णा प्रशासन कब खुलेगा राज और कब होगी अवैध कालोनियों पर एफआईआर। सूत्र कहते हैं कि अवैध लेआउट वाले से राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने पार्टनरशिप बना कर भू माफियाओं को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। जबकि पोद्वरना नगर के मुताबिक नगर की सीमा में जुड़े क्षेत्र में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। मोरडोगरी, सिवनी, वरुड रोड, पारडी गढ़खापा आदि क्षेत्रों में करीब 20 से ज्यादा अवैध कॉलोनियो बनी हैं। इसके अलावा, 47 नेशनल हाईवे बायपास, कलगाव रोड, रेल्वे फाटक के पास आदि इलाकों में अवैध कॉलोनाइजर्स सक्रिय हैं। यहां नगर पालिका की बिना अनुमति के प्लॉट भी बेचे जा रहे हैं। यही नहीं, बगैर किसी जांच-पड़ताल के प्रशासन प्लीटों की रजिस्ट्री भी कर रहा है और नामांतरण भी।धन बल के दम पर भू-माफिया कर रहे गरीब लोगों से लूटफाइल टीएंडसीपी में होने की बात झूठी दरअसल बिल्डर अवैध कॉलोनी की परमिशन की फाइल टीएंडसीपी में होने की झूठी बात कह कर लोगों को फंसाते हैं। जो लोग यह प्लॉट बेच रहे हैं, उनके पास कॉलोनाइजर्स यानी बिल्डर का लाइसेंस भी नहीं है। इसका नुकसान खरीदारों के साथ ही राज्य सरकार को भी हो रहा है। यहां न तो बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था है और न ही बिल्डिंग परमिशन। अनियोजित विकास से पूरे इलाके की तस्वीर ही बिगड़ गई है। इसमें कम आय वर्ग के लोग यहां मकान या प्लॉट नहीं खरीद पाते हैं। बिल्डर ऐसे लोगों की मांग को पूरी करने के लिए कम कीमत में कृषि जमीन का डायवर्जन कराए बिना प्लाटिंग करके बेच देता है। बनगांव रोड, पारडी, रेल्वे फाटक के पास आदि में ऐसी ही कृषि जमीन पर अवैध कॉलोनियां हैं। नक्शा देखकर की जा सकेगी पहचान अवैध कॉलोनी के नक्शों में रोड की चौड़ाई बेहद कम होती है। रोड की चौड़ाई फीट में बताई जाती है। इसमें न तो ओपन स्पेस होता है और न ही पार्क। बिजली, पानी और सीवेज के लिए भी स्थान आरक्षित नहीं होता। सत्ताधारी नेताओं का बना है संरक्षण, कमीशन के दम पर नहीं होती कार्यवाही बगैर किसी जांच-पड़ताल के नहीं कराएं रजिस्ट्री और नामांतरण क्योंकि बिल्डर का लाइसेंस लिए बिना दलाल और किसान वैध बिल्डरों की तरह के पोस्टर छपवाकर लोगों को विकसित कीलीनी का सपना दिखाते हैं। आश्वासन दिया जाता है कि सरकार ही कॉलोनी को वैध कर यहां सुविधा मुहैया कराएगी। इसलिए सरकार रजिस्ट्री और नामांतरण भी कर रही है। जबकि यहां नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं वैध कॉलोनी में एक हजार रुपए वर्गफीट से ज्यादा कीमत में प्लॉट मिल न रहे हैं, लेकिन अवैध कॉलोनी में प्लॉटों की कीमत आधी ली जा रही है। यहां न तो क पार्क है और न ही सीवेज, ड्रेनेज व पानी सप्लाई का सिस्टम। सत्ताधारी छुटभैया नेताओं के सेटिंग से बौखलाये भू-माफिया पांढुरना क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी काटी जा रही हैं। कॉलोनी का नक्शा डायवर्सन पास कराए बिना ही तथा मनमाने तरीके से प्लाट बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइजर बिना पंजीयन के ही यह काम कर रहे हैं। कॉलोनाइजरों के झांसे में फंसने के बाद लोगों को कॉलोनी में सुविधा नहीं मिलती, जिससे वे परेशान होते हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से खेती की जमीन ओने पौने दामों पर खरीद कर अवैध कॉलीनी काटी जा रही है। भू-माफियों के जाल में फंस कर प्लोट करने वाले उपभोक्ता इनके झांसे में आ जाती हैं। नगर में अवैध कालोनियों का कारोबार काफी जोरों पर है अवैध रूप से खेती की जमीन पर काटी जा रही इन कॉलोनियों में रहवासियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती है बाद में लोगों को परेशान होना पड़ता है जिसमे पानी, सडक, नालियां बिजली जैसी कोई मूलभूत सुविधाओं नहीं होती हैं।

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पांढुर्णा प्रशासन की मेहरबानी से भू-माफियाओं के वारे नारे पांढुर्णा में अवैध कॉलोनियो पर कब होगी ठोस कार्यवाही, 23 महीने का हुआ

पांढुर्णा प्रशासन की मेहरबानी से भू-माफियाओं के वारे नारे पांढुर्णा में अवैध कॉलोनियो पर कब होगी ठोस कार्यवाही, 23 महीने का हुआ

वनांचल समाचार जिला ब्यूरो चिफ-निलेश कलसकर
पांढुरना- पांढुरना भाजपा के राज में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद । पांढुर्णा नगर में इन दिनों धड़ल्ले से पनप रही अवैध कालोनियों पर प्रशासन ने मौन साधा है जबकि पांढर्णा जिला अस्तित्व में आने के लिए 22 महीने का समय बीत चुका है लेकिन प्रशासन के सुस्त रवैये पर अब सवाल खड़े होने लगे है। कृषि भूमि को अवैध कॉलोनी कटने से रोकने के लिए काटने वाले और कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर करने का प्रावधान है। इसके बावजूद पांढुर्णा नगर में बैठे जिले के मुख्य अधिकारी अवैध कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ सख्ती कार्यवाही करने की जगह पर खानापूर्ति कर रहे हैं। अवैध कॉलोनाइजर पर इतना क्यो मेहरबान बना है पांढर्णा प्रशासन कब खुलेगा राज और कब होगी अवैध कालोनियों पर एफआईआर। सूत्र कहते हैं कि अवैध लेआउट वाले से राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने पार्टनरशिप बना कर भू माफियाओं को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। जबकि पोद्वरना नगर के मुताबिक नगर की सीमा में जुड़े क्षेत्र में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। मोरडोगरी, सिवनी, वरुड रोड, पारडी गढ़खापा आदि क्षेत्रों में करीब 20 से ज्यादा अवैध कॉलोनियो बनी हैं। इसके अलावा, 47 नेशनल हाईवे बायपास, कलगाव रोड, रेल्वे फाटक के पास आदि इलाकों में अवैध कॉलोनाइजर्स सक्रिय हैं। यहां नगर पालिका की बिना अनुमति के प्लॉट भी बेचे जा रहे हैं। यही नहीं, बगैर किसी जांच-पड़ताल के प्रशासन प्लीटों की रजिस्ट्री भी कर रहा है और नामांतरण भी।धन बल के दम पर भू-माफिया कर रहे गरीब लोगों से लूटफाइल टीएंडसीपी में होने की बात झूठी दरअसल बिल्डर अवैध कॉलोनी की परमिशन की फाइल टीएंडसीपी में होने की झूठी बात कह कर लोगों को फंसाते हैं। जो लोग यह प्लॉट बेच रहे हैं, उनके पास कॉलोनाइजर्स यानी बिल्डर का लाइसेंस भी नहीं है। इसका नुकसान खरीदारों के साथ ही राज्य सरकार को भी हो रहा है। यहां न तो बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था है और न ही बिल्डिंग परमिशन। अनियोजित विकास से पूरे इलाके की तस्वीर ही बिगड़ गई है। इसमें कम आय वर्ग के लोग यहां मकान या प्लॉट नहीं खरीद पाते हैं।

बिल्डर ऐसे लोगों की मांग को पूरी करने के लिए कम कीमत में कृषि जमीन का डायवर्जन कराए बिना प्लाटिंग करके बेच देता है। बनगांव रोड, पारडी, रेल्वे फाटक के पास आदि में ऐसी ही कृषि जमीन पर अवैध कॉलोनियां हैं। नक्शा देखकर की जा सकेगी पहचान अवैध कॉलोनी के नक्शों में रोड की चौड़ाई बेहद कम होती है। रोड की चौड़ाई फीट में बताई जाती है। इसमें न तो ओपन स्पेस होता है और न ही पार्क। बिजली, पानी और सीवेज के लिए भी स्थान आरक्षित नहीं होता। सत्ताधारी नेताओं का बना है संरक्षण, कमीशन के दम पर नहीं होती कार्यवाही बगैर किसी जांच-पड़ताल के नहीं कराएं
रजिस्ट्री और नामांतरण क्योंकि बिल्डर का लाइसेंस लिए बिना दलाल और किसान वैध बिल्डरों की तरह के पोस्टर छपवाकर लोगों को विकसित कीलीनी का सपना दिखाते हैं। आश्वासन दिया जाता है कि सरकार ही कॉलोनी को वैध कर यहां सुविधा मुहैया कराएगी। इसलिए सरकार रजिस्ट्री और नामांतरण भी कर रही है। जबकि यहां नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं वैध कॉलोनी में एक हजार रुपए वर्गफीट से ज्यादा कीमत में प्लॉट मिल न रहे हैं, लेकिन अवैध कॉलोनी में प्लॉटों की कीमत आधी ली जा रही है। यहां न तो क पार्क है और न ही सीवेज, ड्रेनेज व पानी सप्लाई का सिस्टम। सत्ताधारी छुटभैया नेताओं के सेटिंग से बौखलाये भू-माफिया पांढुरना क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी काटी जा रही हैं। कॉलोनी का नक्शा डायवर्सन पास कराए बिना ही तथा मनमाने तरीके से प्लाट बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइजर बिना पंजीयन के ही यह काम कर रहे हैं। कॉलोनाइजरों के झांसे में फंसने के बाद लोगों को कॉलोनी में सुविधा नहीं मिलती, जिससे वे परेशान होते हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से खेती की जमीन ओने पौने दामों पर खरीद कर अवैध कॉलीनी काटी जा रही है। भू-माफियों के जाल में फंस कर प्लोट करने वाले उपभोक्ता इनके झांसे में आ जाती हैं। नगर में अवैध कालोनियों का कारोबार काफी जोरों पर है अवैध रूप से खेती की जमीन पर काटी जा रही इन कॉलोनियों में रहवासियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती है बाद में लोगों को परेशान होना पड़ता है जिसमे पानी, सडक, नालियां बिजली जैसी कोई मूलभूत सुविधाओं नहीं होती हैं।

वनांचल समाचार जिला ब्यूरो चिफ-निलेश कलसकर

पांढुरना- पांढुरना भाजपा के राज में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद । पांढुर्णा नगर में इन दिनों धड़ल्ले से पनप रही अवैध कालोनियों पर प्रशासन ने मौन साधा है जबकि पांढर्णा जिला अस्तित्व में आने के लिए 22 महीने का समय बीत चुका है लेकिन प्रशासन के सुस्त रवैये पर अब सवाल खड़े होने लगे है। कृषि भूमि को अवैध कॉलोनी कटने से रोकने के लिए काटने वाले और कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर करने का प्रावधान है। इसके बावजूद पांढुर्णा नगर में बैठे जिले के मुख्य अधिकारी अवैध कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ सख्ती कार्यवाही करने की जगह पर खानापूर्ति कर रहे हैं। अवैध कॉलोनाइजर पर इतना क्यो मेहरबान बना है पांढर्णा प्रशासन कब खुलेगा राज और कब होगी अवैध कालोनियों पर एफआईआर। सूत्र कहते हैं कि अवैध लेआउट वाले से राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने पार्टनरशिप बना कर भू माफियाओं को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। जबकि पोद्वरना नगर के मुताबिक नगर की सीमा में जुड़े क्षेत्र में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। मोरडोगरी, सिवनी, वरुड रोड, पारडी गढ़खापा आदि क्षेत्रों में करीब 20 से ज्यादा अवैध कॉलोनियो बनी हैं। इसके अलावा, 47 नेशनल हाईवे बायपास, कलगाव रोड, रेल्वे फाटक के पास आदि इलाकों में अवैध कॉलोनाइजर्स सक्रिय हैं। यहां नगर पालिका की बिना अनुमति के प्लॉट भी बेचे जा रहे हैं। यही नहीं, बगैर किसी जांच-पड़ताल के प्रशासन प्लीटों की रजिस्ट्री भी कर रहा है और नामांतरण भी।धन बल के दम पर भू-माफिया कर रहे गरीब लोगों से लूटफाइल टीएंडसीपी में होने की बात झूठी दरअसल बिल्डर अवैध कॉलोनी की परमिशन की फाइल टीएंडसीपी में होने की झूठी बात कह कर लोगों को फंसाते हैं। जो लोग यह प्लॉट बेच रहे हैं, उनके पास कॉलोनाइजर्स यानी बिल्डर का लाइसेंस भी नहीं है। इसका नुकसान खरीदारों के साथ ही राज्य सरकार को भी हो रहा है। यहां न तो बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था है और न ही बिल्डिंग परमिशन। अनियोजित विकास से पूरे इलाके की तस्वीर ही बिगड़ गई है। इसमें कम आय वर्ग के लोग यहां मकान या प्लॉट नहीं खरीद पाते हैं।

 

बिल्डर ऐसे लोगों की मांग को पूरी करने के लिए कम कीमत में कृषि जमीन का डायवर्जन कराए बिना प्लाटिंग करके बेच देता है। बनगांव रोड, पारडी, रेल्वे फाटक के पास आदि में ऐसी ही कृषि जमीन पर अवैध कॉलोनियां हैं। नक्शा देखकर की जा सकेगी पहचान अवैध कॉलोनी के नक्शों में रोड की चौड़ाई बेहद कम होती है। रोड की चौड़ाई फीट में बताई जाती है। इसमें न तो ओपन स्पेस होता है और न ही पार्क। बिजली, पानी और सीवेज के लिए भी स्थान आरक्षित नहीं होता। सत्ताधारी नेताओं का बना है संरक्षण, कमीशन के दम पर नहीं होती कार्यवाही बगैर किसी जांच-पड़ताल के नहीं कराएं

रजिस्ट्री और नामांतरण क्योंकि बिल्डर का लाइसेंस लिए बिना दलाल और किसान वैध बिल्डरों की तरह के पोस्टर छपवाकर लोगों को विकसित कीलीनी का सपना दिखाते हैं। आश्वासन दिया जाता है कि सरकार ही कॉलोनी को वैध कर यहां सुविधा मुहैया कराएगी। इसलिए सरकार रजिस्ट्री और नामांतरण भी कर रही है। जबकि यहां नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं वैध कॉलोनी में एक हजार रुपए वर्गफीट से ज्यादा कीमत में प्लॉट मिल न रहे हैं, लेकिन अवैध कॉलोनी में प्लॉटों की कीमत आधी ली जा रही है। यहां न तो क पार्क है और न ही सीवेज, ड्रेनेज व पानी सप्लाई का सिस्टम। सत्ताधारी छुटभैया नेताओं के सेटिंग से बौखलाये भू-माफिया पांढुरना क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी काटी जा रही हैं। कॉलोनी का नक्शा डायवर्सन पास कराए बिना ही तथा मनमाने तरीके से प्लाट बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइजर बिना पंजीयन के ही यह काम कर रहे हैं। कॉलोनाइजरों के झांसे में फंसने के बाद लोगों को कॉलोनी में सुविधा नहीं मिलती, जिससे वे परेशान होते हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से खेती की जमीन ओने पौने दामों पर खरीद कर अवैध कॉलीनी काटी जा रही है। भू-माफियों के जाल में फंस कर प्लोट करने वाले उपभोक्ता इनके झांसे में आ जाती हैं। नगर में अवैध कालोनियों का कारोबार काफी जोरों पर है अवैध रूप से खेती की जमीन पर काटी जा रही इन कॉलोनियों में रहवासियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती है बाद में लोगों को परेशान होना पड़ता है जिसमे पानी, सडक, नालियां बिजली जैसी कोई मूलभूत सुविधाओं नहीं होती हैं।

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