भाग्य से नहीं, सोच से बनती है किस्मत: जानिए एक अद्भुत कथा के ज़रिए

शाहिद खान, प्राइड इंडिया न्यूज़, सीधी
“जिसे मिलते हैं मौके, पर वह उन्हें पहचान नहीं पाता असली दुर्भाग्य वहीं होता है।”
पुरातन भारतीय कथा कहानियों में छिपे जीवन सूत्र आज भी हमारे सोच और व्यवहार को दिशा दे सकते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कथा है एक भाग्यहीन परिवार की, जो दर्शाती है कि जीवन में मौके कभी-कभी हमारे सामने आते तो हैं, लेकिन हम उन्हें या तो देख नहीं पाते, या पहचानने की अक़्ल खो बैठते हैं।
अगर हम शांत मन से सोचें तो समझ आएगा कि हमें जीवन में बहुत कुछ मिला है। केवल उस पर ध्यान दें जो नहीं मिला, तो यह दृष्टिकोण हमें नकारात्मक बना देता है। किसी भी मुसीबत, अभाव या असफलता को समझदारी से देखने पर, कई बार हम पाएंगे कि हम उतने दुर्भाग्यशाली नहीं जितना हम सोचते हैं।
शिव-पार्वती की कथा से सीखें “अवसर को देखना”
एक पुरानी कथा में बताया गया है कि एक आलसी और नासमझ पति-पत्नी के जोड़े पर पार्वती माँ को दया आ गई। भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेते हुए उनके रास्ते में सोने की ईंटें फिंकवा दीं। लेकिन दोनों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली — यह सोचकर कि वे ‘अंधे बनने का खेल’ खेलेंगे। परिणामस्वरूप, वे ईंटों से टकराकर भी उन्हें पहचान नहीं पाए और अवसर उनके पैरों के नीचे से निकल गया।
पुनः, पार्वती माँ के आग्रह पर, शिव जी ने उनके रास्ते में सोने की मोहरों से भरी थैलियां रखीं। इस बार भी, दंपत्ति ने उन्हें ठोकर मारकर ‘ठीकरियों की थैली’ समझते हुए कुएं में फेंक दिया।
शिवजी बोले – “जो खुद ही अपनी आंखों पर पर्दा डाल ले, वह कैसे देखेगा अवसर?”
कहानी हमें यही सिखाती है कि हम कई बार अपनी नासमझी, आलस्य, या दुराग्रह के कारण ज़िंदगी के मौकों को गंवा देते हैं। फिर हम किस्मत को दोष देते हैं, जबकि गलती हमारी सोच में होती है।
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जीवन सूत्र (संपादकीय बॉक्स):
जो मिला है, उसके लिए आभार रखें।
जो चाहिए, उसके लिए मेहनत करें।
जो खो गया, उससे सीखें।
किस्मत बदलती है, जब सोच बदलती है।
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