छत्तीसगढ़ के युवा लोक गायक तुषांत बारले उप मुख्यमंत्री अरुण साव के हाथों से सम्मानित हुए

छत्तीसगढ़ के ग्राम भेंडरा खपरी जिला बालोद में मिनीमाता मूर्ति अनावरन समारोह में छत्तीसगढ़ के युवा लोक गायक तुषान्त बारले को उनकी कला साधना के लिए मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग के करकमलों से कला साधक सम्मान 2025 प्रदान किया गया।
इस संदर्भ में राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधान पाठक व साहित्यकार डाॅ मुन्ना लाल देवदास ने बताया कि तुषांत बारले छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध पंथी कलाकार एवं भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. राधेश्याम बारले के सुपुत्र हैं । वे छत्तीसगढ़ के विभिन्न मेला, मड़ाई तथा लोक महोत्सव में अपने सुमधुर आवाज में गायन प्रस्तुत कर चुके हैं। इस हेतु उन्हें शासन, प्रशासन एवं सामाजिक स्तरों पर विभिन्न पुरस्कार एवं सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित रंगकर्मी भूपेंद्र साहू कृत लोककला मंच रंगसरोवर में लोक गायक की भूमिका अदा कर रहे हैं। अभी हाल ही में बोरिया रंग महोत्सव 2025 में कला श्री सम्मान से सम्मानित हुए। इसी प्रकार बानबरद लोक कला महोत्सव 2024 में छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान ,गोंडवाना भवन कांकेर 2023 में गुरु बालक दास वीरता सम्मान, 2021 में भोला दशहरा एवं नवा खाई महोत्सव में छत्तीसगढ़ कला रत्न सम्मान, जिला रायपुर में राष्ट्र स्तरीय गुरु घासीदास जयंती समारोह में सांसद रमेश बैस द्वारा लोककला सम्मान,
पिटौरा नंदिनी खुदनी में विधायक राजमहंत डोमन लाल कोर्सेवाडा द्वारा छत्तीसगढ़ कला रत्न सम्मान, आदिवासी लोक कला महोत्सव 2022 में सामाजिक समरसता सम्मान, छत्तीसगढ़ रंग महोत्सव 2018 में सामाजिक चेतना सम्मान,सतनामी आश्रम दुर्ग में छत्तीसगढ़ पंथी रत्न सम्मान,पिटौरा रंग महोत्सव में छत्तीसगढ़ कला रत्न सम्मान ,अछोटी मुरमुम्दा में स्व. हरखराम खेलवार स्मृति सम्मान,कौड़ियां धमधा जिला दुर्ग होली रंग महोत्सव में कला शिरोमणि सम्मान ,जामुल जिला दुर्ग के महोत्सव में छत्तीसगढ़ कला रत्न सम्मान से सम्मानित हुए हैं ।
डाॅ देवदास ने कहा कि तुषांत बारले हमारे छत्तीसगढ़ के उभरते हुए बहुत ही लोकप्रिय लोकगायक हैं। जो युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। जो अपने पिता पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डाॅ आर एस बारले की कला संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।