कोरोना काल में माता पिता से वंचित बेटी की सम्मान पूर्वक हुई शादी – डाॅ देवदास

इसे आप अच्छी तरह से जानते हैं कि कोरोना महामारी की विनाश लीला ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया था । इस कोरोना महामारी से असंख्य लोगों की जानें चली गई। माता पिता की मृत्यु के कारण अनेकों बच्चे बेसहारा हो गए। उनके सामने जीवन यापन की विकट समस्या खड़ी हो गई। ऐसी विषम परिस्थिति में अनेक लोगों ने मानव धर्म का पालन करते हुए बेसहारा बच्चों के पालन पोषण और शिक्षा दीक्षा की जिम्मेदारी उठाई । जिसका ज्वलंत उदाहरण है करेली ग्राम की कु. सोनम और उनके दो छोटे भाई।

इस संबंध में जानकारी देते हुए राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधान पाठक डाॅ मुन्ना लाल देवदास ने बताया कि कोरोना काल में कु. सोनम साहू और उनके दो छोटे भाई अपने माता पिता की मृत्यु के बाद बेसहारा हो गए थे। उन बेसहारा बच्चों को सहारा देने के लिए करेली हाईस्कूल के समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं ने अपने वेतन में से सहयोग फंड बना कर देखभाल किया। कु. सोनम के पढाई लिखाई की व्यवस्था की।
डाॅ देवदास ने आगे बताया कु सोनम के आगे की पढाई लिखाई और पालन पोषण की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के ख्यातिप्राप्त शोर संदेश मानस प्रचार समिति खैरझिटी महासमुंद के व्याख्याकार नंदकुमार साहू ने उठाया। कु.सोनम को अपने परिवार में बेटी की तरह रखकर कालेज तक पढा़या लिखाया । साथ ही अपने घर में उनकी शादी भी पूरे धूमधाम और रश्मों रिवाज के साथ संपन्न किया। इस शादी समारोह में हाईस्कूल करेली के सभी शिक्षक शिक्षिकाओं ने भरपूर सहयोग दिया।
शादी समारोह से एक दिन पूर्व राष्ट्रपति पुरस्कृत डाॅ मुन्ना लाल देवदास भी नंदकुमार साहू के घर खैरझिटी महासमुंद जाकर अपनी ओर से सहयोग और आशीर्वाद दिए। डाॅ देवदास ने इस पुण्य कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि नंदकुमार साहू ने अपने जीवन में पूरे छत्तीसगढ़ में श्री राम चरित मानस के माध्यम से जनमानस को जगाने का प्रशंसनीय कार्य किया है। इसी तरह अन्य मानस मंडलियों को भी मानव सेवा और सामाजिक उत्थान के लिए यथायोग्य कार्य करते रहना चाहिए। क्योंकि श्रीराम चरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है –
परहित सरिस धरम नहीं भाई।
पर पीड़ा सम नहीं अघमाई ।।
दूसरों को सुख देना मानव का सबसे बड़ा धर्म है और दूसरों को दुख देना सबसे बड़ा अधर्म है।