बालू माफियाओं का है बांदा में बोल बाला सरकार की छवि का मुँह कर डालते हैं काला

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बालू माफिया नदी की जलधारा रोककर कर रहे हैं अवैध खनन

बांदा की साड़ी खादर गाटा संख्या 77 नंबर का है पूरा मामला

भारी भरकम मशीनों से छलनी किया जरा नदी का सीना

आखिर कौन सी जिम्मेदारी निभा रहे हैं संबंधित अधिकारी जानकर भी बन बैठे हैं अनजान

या फिर यह कहिए कि बालू माफिया के आगे टेक दिए प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने घुटने या फिर इनके आगे बेच डाला है अपना ईमान

जी हां आपको बता दे की बांदा जनपद के विकासखंड तिंदवारी ग्राम साड़ी खादर के गाटा संख्या 77 नंबर में बालू माफिया का है बोलबाला एक कहावत तो अापने माफियाओं की सुनी ही होगी की रोक सको तो रोक लो लेकिन कुछ इसी की तर्ज में बांदा के ग्राम साड़ी खादर मे बालू माफिया का कहना है किसानों से जो उखाड़ सको तो उखाड़ लो इस बालू माफिया का नाम है हिमांशु मीणा और उनके गुर्गे विजय सचान एवं अजहर खान और इस बालू माफिया की तूती बोलोगी क्यों नहीं चाहे इसे सिस्टम कहिये या फिर सेटिंग या फिर कह लीजिए सिस्टम के साथ में सेटिंग सच तो यही है ना जब सिस्टम हो साथ तो एन जी टी के नियम को मारो लात खनन माफिया के लिए न कोई नियम है और न ही पर्यावरण की परवाह और पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को तो पैसे के दम पर अपनी जेब में लिए घूम रहा है आम आदमी की जान की तो बात ही मत कीजिए जनाब यहां तक जान से मारने की धमकी भी दे देता है किसानो की करीब 2 से 300 बीघा अवैध रूप से किसानों की जमीनों पर कब्जा करके बड़े-बड़े उनके खेतों पर कुआं बना डालें जिनकी तस्वीर हम आपको सीधे दिखा रहे हैं कि किस तरीके से खनन किया जा रहा है और जब किसानों ने मना किया तो उसने जान से मारने की धमकी भी दे डाली इसके बाद किसानों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत पत्र देकर अवगत कराया फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई यह मामला साड़ी खादर के घाटा संख्या 77 नंबर की बात कर रहे हैं अब देखने वाली दिलचस्प बात यह होगी कि क्या बाँदा प्रशासन कार्यवाही करता है या फिर दबंग बालू माफिया यूं हीं एनजीटी के नियम की धज्जियाँ उड़ाता रहेगा या फिर और सरकार का मुंह काला करता रहेगा

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