पत्नी पर चरित्र संदेह कर गोली मारकर हत्या करने वाले पति को आजीवन कारावास एवं 6000 रूपये अर्थदण्ड
न्यायालय श्रीमान श्रीष कैलाश शुक्ल अपर सत्र न्यायाधीश पाटन, जिला जबलपुर के द्वारा प्रकरण क्र. 184/2020 थाना पाटन के अपराध क्रमांक 5/2020 में अभियुक्त रोहिणी प्रसाद मेहरा पिता स्व. दुलीचंद मेहरा, उम्र- 53 वर्ष, निवासी ग्राम झामर, थाना पाटन जिला जबलपुर (म.प्र.) को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 5000 रूपये अर्थदण्ड एवं धारा 27 आर्म्स एक्ट में 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000 रूपये से दण्डित किया गया।
संक्षेप में अभियोजन घटनाक्रम एवं अभियोजन द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण इस प्रकार है कि अभियोगी पंकज मेहरा की सूचना पर दिनांक 03.01.2020 को थाना पाटन में पदस्थ उपनिरीक्षक अर्चना सल्लाम द्वारा इस आशय की देहाती नालसी लेख की गई कि वह दिनांक 03.01.2020 के 10:30 बजे घर से करीब 50 कदम दूर दुकान पर था तभी उसके घर से बंदूक चलने की आवाज आयी। जब उसने घर जाकर देखा तो उसके पिता/अभियुक्त रोहिणी प्रसाद मेहरा ने उसकी मां/मृतक जानकी बाई को रसोईघर में बंदूक से गोली मार दी थी। उसकी मां/मृतक ने खून से लथपथ होकर भागने का प्रयास किया तो उसके पिता/अभियुक्त ने दूसरी बार बंदूक हाथ में लेकर उसकी मां/मृतक का पीछा किया तथा गोली चलायी। उसकी मां/मृतक बचने के लिए भागी तो उसके पिता/अभियुक्त ने हत्या करने की नीयत से उसकी मां/मृतक के पेट में गोली मार दी। अभियुक्त अपनी पत्नी के चरित्र पर शंका करता था और लडाई झगडा करता रहता था। देहाती नालसी के आधार पर थाना प्रभारी शिवराज सिंह द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना पाटन के अपराध क्र-5/2020 धारा 302 भा०द०वि० एवं 27 आर्म्स एक्ट में पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण की विवेचना निरीक्षक शिवराज सिंह एवं उप निरीक्षक अर्चना सल्लाम के द्वारा की गई। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। उपसंचालक(अभियोजन) श्री विजय कुमार उइके एवं जिला अभियोजन अधिकारी श्री अजय जैन के मार्गदर्शन में अभियोजन की ओर से श्री संदीप जैन विशेष लोक अभियोजक के द्वारा मामले में सशक्त पैरवी करते हुये कुल 11 अभियोजन साक्षियो को परीक्षित कराया गया।
श्री संदीप जैन विशेष लोक अभियोजक के तर्को से सहमत होते हुए न्यायालय श्रीमान श्रीष कैलाश शुक्ल अपर सत्र न्यायाधीश पाटन, जिला जबलपुर के द्वारा अभियुक्त रोहिणी प्रसाद मेहरा को आजीवन कारावास एवं कुल 6000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।